Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

niranjan niranjan

Abstract

4  

niranjan niranjan

Abstract

पिता

पिता

1 min
319


जूते के टूटे तलवे,

 पैरों में चुभते कंकड़।

हर कंकड़ उसे दुख दे रहा है,

 परंतु वह हर दुख हंसकर सह रहा है।

 वह कौन है?


वह मेरे पापा है।

परिवार की खुशी के लिए, 

अनवरत मेहनत कर रहा है।

शायद उसे मंजिल पानी है,

 इसलिए वह नहीं रुक रहा है।


हमारी हर खुशी के लिए,

 उसने हर दर्द को सहा है।

हंसता रहता है वह हरदम,

 जब भी घर में आता है।


पसीने की हर बूंद बता रही है,

 कि वह कितना लड़ रहा है।

चाहत नहीं है उसे शान शौकत की,

 वह अपने काम पर ध्यान दे रहा है।


हमारी हंसी उसको ताकत देती है,

उसे काम करने के लिए बल देती है।

विश्वास है उसे अपनी मेहनत पर,

इसलिए वह हर दुख को सह रहा है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract