बहस चल रही है
बहस चल रही है
बहस चल रही है
दो पक्षों के बीच
विषय है हमारा हित
और हम ठहरे भारतीय नागरिक
और हमें एहसास है
पक्ष का भी विपक्ष का भी
उनके अपने अपने तर्को से
एक साथ सहमत होते हुये भी।
जाहिर है
बहस से भी दूर हैं
बहस करने वाले
चाहे वो पक्ष के हों या विपक्ष के
और इस बहस में
एक और पक्ष है
देश का तथाकथित बौद्धिक पक्ष
और यह एक धुनि सा है
जैसे सत्ता का विरोध उनका
जन्मसिद्धाधिकार सा है
और उसका सरवोत्तम उपयोग
यही है जो उनका अपना पक्ष है
कभी पक्ष सा कभी विपक्ष सा।
सचमुच इस शोर भरी बहस से
सभी सहमत हैं
बहस का हिस्सा बनने में
बने रहने में
एक दिलचस्प मंजर है
जो सत्ता के बिरोध में है
वो इस भ्रष्टतम ब्यवस्था से
सहमति जता रहे हैं
और जो सत्ता में हैं
कह रहे हैं हम नयी ब्यवस्था बना रहे हैं
अब यह बहस बड़ी पुरानी भी है
और बड़ी नयी भी है
निजीपूंजी और सार्वजनिक पूंजी के
बीच उलझी उलझी।
