STORYMIRROR

Short And Sweet Blog

Inspirational

4  

Short And Sweet Blog

Inspirational

भीड़ में भी अकेला समझता था।

भीड़ में भी अकेला समझता था।

1 min
555

चलता था मैं भी कभी भीड़ में,

अकेले होने का डर सताता था।

तपती धूप में चप्पल पहनकर निकलता था,

जलने से डर लगता था।


डर हर उस चीज से लगता था,

मुझे खुद को खोने से डर लगता था।

डरता था बेचैन होता था,

जमाने को कुछ भी कहने से पहले बहुत सोचता था।


सोचता था शायद इसलिए डरता था,

डर की वजह शायद मेरे अंदर ही थी।

अंदर थी, शायद इसीलिए भी बिलखता रोता था।


खुद की अच्छाइयों का शायद पता नहीं था,

तभी तो खुद को भीड़ में भी अकेला समझता था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational