STORYMIRROR

Amit Kumar

Tragedy

4  

Amit Kumar

Tragedy

भारत

भारत

1 min
189

मेरे ख्वाबों का रँगीन भारत

बोलो अब कहाँ है

जो दिल में धड़कन सा बसता था 

वो अजीज भारत

बोलो अब कहाँ है

जहाँ हिन्दू न मुसलिम

न सिख न ईसाई

सिर्फ भाई -भाई रहते थे

रिश्तों की पहचान वो भारत

बोलो अब कहाँ है

जहां गुरबत कोसों दूर रहती थी

सोने की चिडिया बनकर

खुशियां सिरमौर रहती थी

कश्मीर से कन्याकुमारी तक

बस राष्ट्रगान चलता था

मेरे देश का ध्वज 

वीरों की शान हुआ करता था

शूरवीरों की शहादत का वो भारत

बोलो अब कहाँ है........

  


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy