भारत माता की जय
भारत माता की जय
जन्म दायिनी है जो हम सबकी, हिन्द की ऐसी पतित पावनी धरती को सलाम,
जिसकी माटी में खेलकर सशक्त बना हमारा यें जिस्म, उस भारतमाता को शत शत प्रणाम।
धरती पे इसकी फलते फल फूल, सब्ज़ी और सामग्री जो हैँ हमारें ऊर्जा के स्त्रोत,
जीवनदात्री,परम प्रतापी, ओजस्वी ऐसी कर्मभूमी को मेरा आभार और शत शत प्रणाम।
कदम बढा कर जिस भूमि पर पा लेते हम हर मँज़िल, तय कर लेते हर डगर, चाहें हों मुश्किल या आसान,
ऐसी यशस्वी हिन्द की धरा को मेरा कोटि-कोटि नमन और आभार।
गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम स्थल पर स्थित जहां प्रायागराज,
हिमालय जिसका करता प्रतिपल संरक्षण,सजा जिसके सर पर ताज़,
ताज़ महल, लाल किला,चार मीनार,क़ुतुब मीनार करतीँ जिसको गुले गुलज़ार,
समान भाव से करती सबका पालन पोषण, रंक हों चाहे कोई या हों कोई विद्वान,
कण-कण में जिसके बसें हैँ सीता-राम, कृष्ण और हनुमान,
उस पावन धरती माँ के चरणों में हमारा तन मन धन,सर्वस्व है अर्पण,
भारतमाता को पूर्ण श्रद्धा और ह्रदय से आज करते हम वंदन।
ऋषि मुनियों की तपोभूमि है जो , गुरु का दर्जा होता जहाँ भगवान से भी ऊपर,
वेद पुराणों की ध्वनि विद्यमान जहाँ के रेशे रेशे मेँ,
ऐसी पतित पावनी भारत माँ को सत्यनिष्ठा से हमारा नमन।
एक हस्त मेँ जिनके तिरंगा,दूजा उठा देने हमें आशीष और आशीर्वाद,
कमल पर विराजमान, सिँह पर सवार, भारत माता को प्रणाम।
जन-गण-मन जिसका राष्ट्रीय गान, पुराण और उपन्यास जिसकी धरोहर,
धरती माता के आँचल की छाया में पले वीर-जवान सौजन्य से जिनके सुरक्षित हैँ घर -घर।
जय हिन्द का जयघोष व्यापक जिसके कतरे-कतरे,रेशे-रेशे मेँ,
जिसके गर्भ से उत्पन्न हुए हम सब बूढ़े, बच्चे और जवान,
जय जवान जय किसान का होता जहां पल-पल गुणगान,
ऐसी पतित पावनी, महिमायमयी, वन्दनीय इस धरती माँ का ह्रदय से आभार और अभिनन्दन।

