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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

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Ganesh Chandra kestwal

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भारत की छटा

भारत की छटा

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हिम मुकुट शुभ शीश राजे सिंधु पग में झूमता।

पोषता जो इस धरा को मेघ नभ में घूमता।

हिमशिखर हैं हर मनोहर व्योम को नित चूमते।

ताल सुंदर वारि-पूरित वायु गति से झूमते ॥१॥


नीर नदियों का मधुर है देश को वह सींचता l।

जीव जीवन नित्य देता भाग्य रेखा खींचता।

वन-विटप बहु भाँति सुंदर प्राण सब में भर रहे।

सोखते हैं ताप भू का विष सकल भी हर रहे॥२॥


मालिका वन पुण्य सलिला राष्ट्र उर में राजतीं।

सांस्कृतिक शुभ छटा भी विश्व भर में साजती।

एकता की भावना प्रिय भारती की मूल है।

धर्म की सद्भावना भी काटती हिय शूल है॥३॥


देश मेरा सोहता है विश्व गुरु के रूप में।

भूमि पर जो पेट भरता नित्य तपता धूप में।

ज्ञान की गंगा सुहानी पुण्य भाषा बोलती।

गुरुजनों की दिव्य वाणी गाँठ मन की खोलती॥



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