STORYMIRROR

Jyoti Agnihotri

Inspirational

5.0  

Jyoti Agnihotri

Inspirational

भार

भार

1 min
734


निज स्वार्थ के ही दास हैं जो,

कब निज हृदय के पास हैं वो।


मानवता महज उनमें बस रेंगती है,

जिन्दगी भी ऐसों को बस ठेलती है।


व्यसन औ दमन की कामना ही,

इनके स्वार्थपूर्ण हृदयों में खेलती है।


अनन्त काल ही से धरा भी,

इनके भार को मूक झेलती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational