STORYMIRROR

Jyoti Agnihotri

Others

3  

Jyoti Agnihotri

Others

अब तुम

अब तुम

1 min
316

दग्ध हृदय के स्तब्ध क्षणों को,

कैसे अब तुम स्निग्ध करोगे

विगत हुए हैं जो मधुक्षण,

बोलो कैसे अब तुम ,

उनको स्मित में भरोगे?

विछिन्न हो चुकी लालसाओं को,

बोलो कैसे अब अभिन्न करोगे?

विगत कई बार तो क्या

आगत को भी क्या खिन्न करोगे?

दग्ध हृदय के स्तब्ध क्षणों को,

कैसे अब तुम स्निग्ध करोगे?



Rate this content
Log in