STORYMIRROR

Dr Sanjay Saxena

Children

4  

Dr Sanjay Saxena

Children

बेटी का दर्द

बेटी का दर्द

1 min
322

क्या बेटी को दर्द नहीं होता

उस दर्द का संदर्भ नहीं होता

बचपन में वह डांट खाती है

फिर ताउम्र उसे छुपाती है


पढ़ने पढ़ाने का जब वक्त आया

टीचर ने उसको आंख दिखाया

अब उसका दिल भर आया

उसके मन में दर्द उभर आया


लड़कपन हंसते खेलते यों रोता

अपने अनमोल आंसुओं को खोता

जैसे नीड से उड़ जाता परिंदा तोता

बेटी मार बैठी अपने गमों में गोता


जाग उठी यों जैसे नींद से कोई सोता

संभालता कोई अगर जो अपना होता

संभालता अगर..........................


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Children