बेहिसाब मोहब्बत
बेहिसाब मोहब्बत
जिनसे की है
बेहिसाब मोहब्बत
माना दूर हैं वो
आज हमसे
इस दिल में तो बसेंगे
वो ही हमेशा
दूर नहीं हो सकते
कभी इस दिल से
हम तो आज भी
दीवाने हैं उनके
चाहें दूर हो वो
कितने भी हमसे
जगह की दूरियाँ
नहीं बना या बिगाड़
सकती ये रिश्ते
मजबूर हैं हम
इस कदर
सिवा उनकी खैरियत
माँग नहीं सकते कुछ
और अपने रब से
रहें वो कहीं भी
चाहे इस जहाँ में
चाहते हैं हम बस इतना
कभी ना हों
वो गुमसुम से
रब दे दे हमारे हिस्से की
खुशियाँ भी उनको
रोशन हो उनकी दुनिया
हर तरफ से
बस यही सब दुआ
हमारी अगर कुबुल हो जाए
तो हम भी हो जाएँ
फिर कुछ बेफिक्र से.

