Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Jalpa lalani 'Zoya'

Tragedy

3  

Jalpa lalani 'Zoya'

Tragedy

बदलते हैं

बदलते हैं

1 min
261


कलयुग के इस संसार में पल-पल इंसान रूप बदलते हैं

समंदर रूपी जीवन में पल-पल हालात रुख़ बदलते हैं


स्वार्थ के बने आशियाने में पल-पल बदलते रिश्ते हैं

हीरे भी तभी चमकते हैं जब बार-बार उसे घिसते हैं


आधुनिकता के बाजार में पल-पल ख़रीददार बदलते हैं

कहानी में भी तभी मोड़ आता है जब किरदार बदलते हैं


वक़्त कहाँ रुकता है पल-पल करके साल भी बदलते हैं

ठहरा कौन है यहाँ चलने वाले हर चाल भी बदलते हैं।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy