STORYMIRROR

Anjana Singh (Anju)

Fantasy

4  

Anjana Singh (Anju)

Fantasy

बचपन कि वो बारिश

बचपन कि वो बारिश

1 min
353

आज जब देखती हूं 

इन बारिश की बूंदों को

मन बचपन में पहुंच जाता

जो मन को बहुत था लुभाता


बचपन में संग बारिश के

मैं कितना खेला करती थी

मन ना भरा करता था

ऐसे भींगा करती थी


ना आज की फिक्र और 

ना ही कल का डर

छपाक लगाते हुए हम

रहते थे बेहद निडर


इन बूंदों के गिरने से

मन छलक सा जाता था

इन बूंदों में भींग कर

मन आनंदित हो जाता था


आज जब कमरे के झरोखों से

देखती हूं इस बारिश को

राहत कम आफत लगती है

जो थी कभी लुभाती अब डराती है


पहले हम जिस बारिश में

कितनी छपाके लगाते थे

आज उसी बारिश में

कीड़े मकोड़े दिखते हैं


बचपन की बारिश में हमें

 चिंता ना थी काम पर जाने की

आज देखो काम के साथ-साथ 

चिंता रहती कपड़े सुखाने की


गर्मियों से तपती धरती पर

जब बारिश की बूंदें पड़ती है

तन मन शीतल हो जाता है

 जब यह बूंदें बरसती है


आज इन बारिशों के संग

खेलने की फुर्सत कहां

अपने अपने कामों में हैं सब व्यस्त

नज़ारे लेने का वक्त कहां


कभी लगता है यूं

आवाज देकर ये बूंदें

मुझको बुला रही है

साथ खेलने को

फिर आवाज लगा रही है


काश! पुनः लौट आती

वो बचपन की बारिश

मन में उमंग भरकर

मिटा देती सारी तपिश


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy