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Sandeep Kumar

Drama

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Sandeep Kumar

Drama

बच्चा कच्चा होता है

बच्चा कच्चा होता है

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बच्चा बच्चा बच्चा है

नादान उम्र का कच्चा है

उस पर जैसा रंग चढ़ा दो

वह रंग जाता वैसा है।


हर्ष उल्लास से गर्वित होकर

सबके सामने आ जाता है

लल्ला नंदकिशोर बुलाकर

सब गोद उठा लेता है।


इतना प्यारा जग में न्यारा

कुछ और नहीं भाता है

मन को मोहित करने वाला

जग में इकलौता होता है।


मीठे मधुर स्वर में मानो

मिश्री घोल देता है

रग रग में मानो ऐसे

ईश्वर आ कर बस जाता है।


इतना सुहाना प्यारा न्यार

और क्या लग पाता है

शांति प्रिया गोद में आकर

धीरे-धीरे बैठ जाता है।


चॉकलेट बिस्किट के लिए

हरदम शोर मचाता है

बस अपना इच्छा पूर्ति को

सबको नाचना चाहता है।


बच्चा बच्चा बच्चा है

नादान उम्र का कच्चा है

उस पर जैसा रंग चढ़ा दो

वह रंग जाता वैसा है।


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