Anjana Naik,Anju..Deogarh
Children
आसमान से जब गिरती है पानी
रिम् झिमा-रिम् झिम्
पंख फैलाए नाचती है मौर रानी
छम् छमा-छम् छम् (2)
सावन आया बादल छाया
काला काला घन् घना घन् घन्
बादल गरजा बिजली चमके
चम् चमा -चम् चम्
पापा......
मेरी बेटी मेर...
मेरे हमसफर .....
सनम
झूठा दिलासा.....
बांसुरी
प्यार की परिभ...
बारिश
निसंग राही
आसमान से दो ब...
बचपन में तेरी उंगली पकड़कर चलना, गोदी की पालकी में सुकून से पलना, तेरी लोरी में चाँद तारों से मिलना, ... बचपन में तेरी उंगली पकड़कर चलना, गोदी की पालकी में सुकून से पलना, तेरी लोरी में च...
मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...! मेरा बचपन, मेरे सपनों में ही रह गया...!
नन्ही सी बिटिया थी वह तूफ़ानी रात को आयी थी ! नन्ही सी बिटिया थी वह तूफ़ानी रात को आयी थी !
'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की ऊंचाई नापना, बचपन क... 'गिल्ली से घरों के काँच तोड़ना,कंचों से दोस्तों के कंचें फोड़ना, पतंगों से घरों की...
यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी । यह कविता आपको अपने बचपन की याद दिलाएगी ।
भूधर से सुंदर जो पाया था मैंने वह विस्मययुक्त स्वर्गलोक। भूधर से सुंदर जो पाया था मैंने वह विस्मययुक्त स्वर्गलोक।
जाने क्या क्या लिख जाता है वो प्रेम सुहाना बचपन का मुझे बचपन याद दिलाता है। जाने क्या क्या लिख जाता है वो प्रेम सुहाना बचपन का मुझे बचपन याद दिलाता...
नौ एकम नौ, खुद पर भरोसा करो। नौ दूनी अट्ठारह, इरादा मज़बूत हमारा ।। नौ एकम नौ, खुद पर भरोसा करो। नौ दूनी अट्ठारह, इरादा मज़बूत हमारा ।।
वे शैतानियां याद कर लेते हैं। एक बार फिर बचपन जी लेते हैं। वे शैतानियां याद कर लेते हैं। एक बार फिर बचपन जी लेते हैं।
कोई तारें बिछा दो फोन की भगवान के घर तक,मुझे माँ तक बात पहुंचानी है। कोई तारें बिछा दो फोन की भगवान के घर तक,मुझे माँ तक बात पहुंचानी है।
स्कूल का वो पहला दिन स्कूल का वो पहला दिन
वह उन्मुक्त गगन की प्रियतमा थी, और मैं, मैं तो अपने ही विचारों के भार से निस्तेज थी वह उन्मुक्त गगन की प्रियतमा थी, और मैं, मैं तो अपने ही विचारों के भार से...
पूछे हमारा हाल दें हमें सम्मान पर थी नादानी यह हमारी, नासमझी अपनी पूछे हमारा हाल दें हमें सम्मान पर थी नादानी यह हमारी, नासमझी अपनी
कैसे बिठायें कंप्यूटर के समक्ष, एकाग्रता बच्चों की खो रही है कैसे बिठायें कंप्यूटर के समक्ष, एकाग्रता बच्चों की खो रही है
गिर जाते हैं मिट्टी में दाने, सूखे फल जो जमा कर रखे थे गिलहरी ने आने वाले समय के लिए टहनियों के ... गिर जाते हैं मिट्टी में दाने, सूखे फल जो जमा कर रखे थे गिलहरी ने आने वाले समय...
तूने अपना संसार बसाया फिर अपना परिवार बढ़ाया अपनी खुदगर्जी के ख़ातिर तूने मेरा खून बहा तूने अपना संसार बसाया फिर अपना परिवार बढ़ाया अपनी खुदगर्जी के ख़ातिर तूने...
वे माँ-बाप थे जो अब तस्वीरों में चुप हैं हम कलेजे थे उनके, वे हमें लख्ते-जिगर कहते थे... वे माँ-बाप थे जो अब तस्वीरों में चुप हैं हम कलेजे थे उनके, वे हमें लख्ते-जिगर क...
बरगद होने के बाद तुम समझोगे प्रकृति और माँ को। बरगद होने के बाद तुम समझोगे प्रकृति और माँ को।
एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...! एक मांँ ही समझती है, अपनी संतान को कैसे पालती है वो...!
कहां खो गए वो हरे भरे खेत, कहां खो गई वो रेत? कहां खो गए वो हरे भरे खेत, कहां खो गई वो रेत?