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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

बाक़ी है

बाक़ी है

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पुराने शहर में मेरा मकान बाकी़ है।

सब ज़मी दोज़ है लेकिन निशान बाकी़ है।


अभी भी बाकी है कि़स्सा जु़बान पर कोई।

ज़हन में लोगों के नामों निशान बाकी़ है।


शहर में आके भुला दी है गांव की यादें।

हमारे गांवों में सब खानदान बाकी़ है।


ज़मीर बिक नहीं सकता हमारा दौलत से।

ग़रीब हूं मगर मुझ में ईमान बाकी़ है।


गर चे शाहीन परिंदा हूं ऐ ज़मी लेकिन।

मेरी उड़ान को कुल आसमान बाकी़ है।


अगर चे सीता भी इल्ज़ाम से न बच पाई।

अब मुझे लगता मेरा इम्तिहान बाकी़ है ।


तुम्हारे होठों को मेरी ग़ज़ल मुबारक हो।

हमारे इश्क़ में कुछ जा़फरान बाकी है।


तुम्हे ही तंग करूंगा,न तंग कर दामन।

हमारी रूह में अब तक थकान बाकी़ है।


सगी़र मुझ पे बरसता है आज तक पत्थर। 

रकी़बों के लिए मेरा मकान बाकी़ है।


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