STORYMIRROR

Akanksha Hatwal

Drama

3  

Akanksha Hatwal

Drama

बाहर न निकले

बाहर न निकले

1 min
192

निकलो न बाहर,

के बाहर निकलने से

फिर तुम्हें ही ग़म होगा।


सोच ले दुनिया को सितम देने में

पहला तेरा कदम होगा।

कुछ पल ठहर जा,

फिर शायद थोड़ा

बदला बदला आलम होगा।


तुझे कुछ न होगा,

तू महफूज़ है,

दूर ये तेरा हर भ्रम होगा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama