Akanksha Hatwal
Drama
निकलो न बाहर,
के बाहर निकलने से
फिर तुम्हें ही ग़म होगा।
सोच ले दुनिया को सितम देने में
पहला तेरा कदम होगा।
कुछ पल ठहर जा,
फिर शायद थोड़ा
बदला बदला आलम होगा।
तुझे कुछ न होगा,
तू महफूज़ है,
दूर ये तेरा हर भ्रम होगा।
बिक गया
अवाक
जायज़
दोगलापन
बाहर न निकले
नारी प्रेम की...
आखिरी अलविदा ...
ए वक्त आ के बता ना मुझे तुम्हे रोकने का तरीका ताकि मैं भी थोड़ा आराम कर सकूँ...! ए वक्त आ के बता ना मुझे तुम्हे रोकने का तरीका ताकि मैं भी थोड़ा आराम कर सकूँ....
है महत्व जग में अति भारी, सब कोई जाने माने है महत्व जग में अति भारी, सब कोई जाने माने
पद वैभव भी काम नहीं दें, नहीं कोई संताप हरे पद वैभव भी काम नहीं दें, नहीं कोई संताप हरे
समाज के सवालों का क्या जवाब दे पाऊंगी दामोदर मै राधा ना बन पाऊंगी । समाज के सवालों का क्या जवाब दे पाऊंगी दामोदर मै राधा ना बन पाऊंगी ।
वो सुबह और वो शाम लिखूं कैसे एक फौजी की कहानी लिखूं वो सुबह और वो शाम लिखूं कैसे एक फौजी की कहानी लिखूं
तुमसे रक्षाबंधन पावन, तेरी राखी बंधी मेरी कलाई वचन निभाएगा रक्षा का, तुमसे रक्षाबंधन पावन, तेरी राखी बंधी मेरी कलाई वचन निभाएगा रक्षा का,
मायके की अनुभूति देता भाई का घर परिवार मायके की अनुभूति देता भाई का घर परिवार
पहले हिस्से में सच लिखा है, दूसरे हिस्से में जो हो सकता था, सिर्फ वो लिखा है। पहले हिस्से में सच लिखा है, दूसरे हिस्से में जो हो सकता था, सिर्फ वो लिख...
खुशियां सब तुझसे ही पूरी होनी है कुछ अनकही बातें आँखों से कहनी है...! खुशियां सब तुझसे ही पूरी होनी है कुछ अनकही बातें आँखों से कहनी है...!
भाई हो भरत जैसा जो भाई के लिए मिली राज्य छोड़ दे भाई हो भरत जैसा जो भाई के लिए मिली राज्य छोड़ दे
न रोटी न पानी किसी को नैतिकता कहां तेरी ये तो बता न रोटी न पानी किसी को नैतिकता कहां तेरी ये तो बता
हर मुस्कान में खुशियां ही भरे, हर खुशी में अपनेपन का एहसास भरे। हर मुस्कान में खुशियां ही भरे, हर खुशी में अपनेपन का एहसास भरे।
मिटा दो दूरी, आजा ओ पास मेरे, मैं इश्क की प्यास मिटाना चाहता हूं। मिटा दो दूरी, आजा ओ पास मेरे, मैं इश्क की प्यास मिटाना चाहता हूं।
ये दर्द -ऐ-दास्तां किसको सुनाऊँ जिसको देखो मुझसे ज्यादा बीमार बैठे है। ये दर्द -ऐ-दास्तां किसको सुनाऊँ जिसको देखो मुझसे ज्यादा बीमार बैठे है।
अच्छा-बुरा मैं क्या जानूं बेरोजगार की मदद को निकल पड़ा।। अच्छा-बुरा मैं क्या जानूं बेरोजगार की मदद को निकल पड़ा।।
मेरी रूह में तू बस जा मेरी ही साँस बनके... मेरी रूह में तू बस जा मेरी ही साँस बनके...
तू है मेरे ख्वाबों की मल्लिका, मिलन करना मेरी महेबूबा। तू है मेरे ख्वाबों की मल्लिका, मिलन करना मेरी महेबूबा।
रोका है जिसने उड़ान से काश वो हर बेड़ी टूट जाए। रोका है जिसने उड़ान से काश वो हर बेड़ी टूट जाए।
घड़ी वही 'बिल्ली' है जिससे मैं भी आंखें बंद कर लेता हूँ घड़ी वही 'बिल्ली' है जिससे मैं भी आंखें बंद कर लेता हूँ
अच्छी सोच कायम करते हैं जिससे आगे कोई नहीं सोच सकता। अच्छी सोच कायम करते हैं जिससे आगे कोई नहीं सोच सकता।