बाहें फैलाकर अगर।
बाहें फैलाकर अगर।
प्यार में तेरे दीवाना हो जमाना भूल जाता
छोड़कर दुनिया तुम्हारे प्यार में दुनिया बसाता
तुम कभी मुझको आवाज देकर तो बुलातीं ।
मैं तुम्हारे प्यार में फिर पांव नंगे दौड़ आता ।
बाहें फैलाकर अगर नयन अपने तुम झुकातीं
मैं तेरी बाहों में आकर स्वर्ग को भी भूल जाता
झुलसती लू में भी फूल दिल के तुम खिलातीं
बहारों की ख्वाहिशों को मैं सदा को भूल जाता।
अपने दुख और परेशानी में मुझे तुम आजमाती।
गम तुम्हारे सभी लेकर तुम पे खुशियां मैं लुटाता।

