औरत का दिल
औरत का दिल
समुन्दर की गहराई नाप ली नदियों की
लम्बाई नाप ली ,
सूरज की रोशनी भांप ली अंधेरों में रातें
भी काट ली !
था वो आदमी जो हिमालय की चोटी छू
आया,
रखा चाँद पर कदम और चाँद की मिट्टी
ले आया !
रास्तों की खाक भी छान ली पर मंजिल
तक न वो पहुँच पाया ,
एक औरत के दिल में है क्या ये आदमी
न कभी समझ पाया !!
