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Kumar Vikash

Drama Others

4.8  

Kumar Vikash

Drama Others

औरत का दिल

औरत का दिल

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समुन्दर की गहराई नाप ली नदियों की

लम्बाई नाप ली ,

सूरज की रोशनी भांप ली अंधेरों में रातें

भी काट ली !

था वो आदमी जो हिमालय की चोटी छू

आया,

रखा चाँद पर कदम और चाँद की मिट्टी

ले आया !

रास्तों की खाक भी छान ली पर मंजिल

तक न वो पहुँच पाया ,

एक औरत के दिल में है क्या ये आदमी

न कभी समझ पाया !!


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