Amarjeet Kumar
Drama
हे माँ मातृभूमि अर्पण,
क्या बरबस तुझको करू अर्पण।
दे दूँ तन या मन व संपूर्ण जीवन
देना चाहता हू कुछ अद्वितीय अन्य,
जिससे हो जाऊँ मैं धन्य।
स्वप्न मेरे माँ करना सम्पन्न,
रक्षा व सुरक्षा करूं
तेरी ताकत देना संपूर्ण।
हे माँ मातृभूमि नमन।
नववर्ष
मित्रत्व एक ...
नारी
मृगनयनी
स्त्री का प...
अपना नसीब
धारा 370 इक ...
अर्पण
पुत्र को पिता पहाड़ जैसे लगने लगता है ।। पुत्र को पिता पहाड़ जैसे लगने लगता है ।।
तुम हो पहचान मेरी मां हूं तो मैं तुमसे अलग पर तेरी ही छवि हूं मैं मां। तुम हो पहचान मेरी मां हूं तो मैं तुमसे अलग पर तेरी ही छवि हूं मैं मां।
सदियों से मैं तड़प रहा हूँ, आ के तड़प मेरी दूर करना सदियों से मैं तड़प रहा हूँ, आ के तड़प मेरी दूर करना
अपनी बंद मुट्ठी में खुद को समेटे चला, भोर की पहली किरण से दो बातें करता, अपनी बंद मुट्ठी में खुद को समेटे चला, भोर की पहली किरण से दो बातें करता,
सुख दुःख दुनिया जीव अधारा सकल जगत के हो संकट हारा सुख दुःख दुनिया जीव अधारा सकल जगत के हो संकट हारा
हूँ हैरान में भी ये सब देखकर, जिसे दोस्ती तुम बता रहे हो। हूँ हैरान में भी ये सब देखकर, जिसे दोस्ती तुम बता रहे हो।
रोज़ रोज़ वो ही कुछ चार दीवारें, अब मन को भाती नहीं है रोज़ रोज़ वो ही कुछ चार दीवारें, अब मन को भाती नहीं है
काफी अजीब सा है ये रिश्तों का सिलसिला, काफी अजीब सा है ये रिश्तों का सिलसिला,
वो अजनबी एक दिल तुम्हें पुकार रहा है, उनसे कहना, तुम्हारा उनका मिलन हमारे जैसा नहीं। वो अजनबी एक दिल तुम्हें पुकार रहा है, उनसे कहना, तुम्हारा उनका मिलन हमारे जैस...
दिल की धड़कन तेज़ बनी तेरा, प्रेम गीत मैंने गा लिया।... दिल की धड़कन तेज़ बनी तेरा, प्रेम गीत मैंने गा लिया।...
ब इतना भी ना बांटो, कि अपने ही दिल ओर दिमाग में भी बट जाए । ब इतना भी ना बांटो, कि अपने ही दिल ओर दिमाग में भी बट जाए ।
मेरे लफ्जों में घुलने कि आदत हो तुम। मेरे लफ्जों में घुलने कि आदत हो तुम।
भावों के प्रेत कभी पीछा नहीं छोड़ते ! भावों के प्रेत कभी पीछा नहीं छोड़ते !
पहला क़दम चला था मेरी उंगली पकड़कर पल भर में कमबख्त यार मेरा बड़ा हो गया। पहला क़दम चला था मेरी उंगली पकड़कर पल भर में कमबख्त यार मेरा बड़ा हो गया।
और वहां से जवाब भी आया, कि यहां अब तेरा कोई नहीं रहता। और वहां से जवाब भी आया, कि यहां अब तेरा कोई नहीं रहता।
हाय ! ये तेरी आँखें देख ले जो भी मुसाफ़िर भूल जाए अपनी राहें ! हाय ! ये तेरी आँखें देख ले जो भी मुसाफ़िर भूल जाए अपनी राहें !
लक्ष्य से ना, भटकना है तुम्हें मत बोल के, हम अब, लौट चलें। लक्ष्य से ना, भटकना है तुम्हें मत बोल के, हम अब, लौट चलें।
प्यार करने का लेकिन इरादा और नीयत साफ़ थी एक चाहत है तुम्हारे साथ जीने की, प्यार करने का लेकिन इरादा और नीयत साफ़ थी एक चाहत है तुम्हारे साथ जीने की,
मेरे नज़र तुझ से मिली और, प्यार की ज्योत ज़ल गई। मेरे नज़र तुझ से मिली और, प्यार की ज्योत ज़ल गई।
घर का पूरा बोझ उठाओ सबके मन का खाना पकाओ घर का पूरा बोझ उठाओ सबके मन का खाना पकाओ