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AVINASH KUMAR

Abstract

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AVINASH KUMAR

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ऐ वक्त तू गुनहगार है मेरा

ऐ वक्त तू गुनहगार है मेरा

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ऐ वक्त तू गुनहगार है मेरा 

जो चल रहा हूँ मैं अकेला 

सुबह, दोपहर, शाम 

जरा थम पहले कर हिसाब मेरा


क्यूँ तूने यूँ सितम दिए

क्या बिगाडा़ मैंने तेरा

तू बड़ा बेरहम है 

भावनाओं से है खेलता

काश कभी किसी लम्हें से 

तुझे भी पड़े दुख झेलना


खैर कोई बात नहीं

अब मुश्किल हालात नहीं 

बना के मुसाफिर इस दुनिया का 

तूने किया अच्छा नहीं 


हर किसी को भ्रम है कि तू उसका है 

पर मैं जान चुका तू नहीं किसी का है 

चल तुझे तेरी गलतियां गिना दूँ

सुधार सके तो सुधार 


मैं बंदा हूँ ऐसा मरकर भी ना मानूँ हार 

देखता हूँ तू अब क्या देता है उपहार 

मुझे है सकारात्मकता से वास्ता

नकारात्मकता से नहीं कोई सरोकार 


फिर देख ले तू सोच समझ ले तू

ना खेल मुझसे ना कर व्यापार 

जो चाहूँ मैं हृदय की गहराईयों से 

उसे साकार कर बस यही गुहार


यही तेरे गुनाहों का प्रायश्चित होगा

आज नहीं तो कल होगा

वरना तू रहेगा गुनहगार 

ऐ वक्त तू गुनहगार है मेरा

जो चल रहा हूँ मैं अकेला।


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