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Dr.Narendra kumar verma

Fantasy Inspirational

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Dr.Narendra kumar verma

Fantasy Inspirational

ऐ स्वतंत्र मानुष

ऐ स्वतंत्र मानुष

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ऐ स्वतंत्र देश के स्वतंत्र मानुष,

अपना सामर्थ्य पहचानो तुम,

देश की खातिर लड़े हैं बलिदानी, 

अपना फर्ज निभाओ तुम !


गुलामी की जंजीरों में था जब भारत,

हिंद के जवानों की फौज बनी,

शहीद हुआ इस माटी का पुत्र,

पवित्र धरा के अभिमान पर,

अमल में लायी आजादी स्वतंत्र भारत के निर्माण में, 

उठो जागो साकार करो तुम, शहीदों के अभिमान को,

स्वतंत्रता से मुख न मोड़ो, यज्ञ स्वीकार करो तुम! 


ऐ स्वतंत्र देश के स्वतंत्र मानुष, 

मुट्ठी भर बीजों से खेतों को लहरा दो तुम, 

कर्म का शाश्वत वार करो तुम ,

तरुणा और विश्वास का निर्माण करो, 

अंधीयारों में उजाला फैलाओ तुम! 


मुश्किल होती है डगर, लेकिन ना घबराओ तुम, 

शिक्षा और शस्त्रों को अपनाओ,

प्रबलता को स्वीकार करो तुम, 

स्वर्ण युग निर्माण में अपना अंश निभाओ तुम!


"ऐ स्वतंत्र देश के स्वतंत्र मानुष!"



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