अदाकारी
अदाकारी
कभी अनजानी
न जाने कैसे नजदीकियां
फिर दूरियां
खुदाया मुहब्बत में
दुश्मनी सी
शह मात का खेल
बावजूद
निपट अनाड़ी
कुछ रस्में सीखी
कुछ कसमें सीखी
न जाने किन किन
झूठे किरदारों से गुजरा
और शायद
जो थी कभी न उनमें जरा सी
सीखी वो सारी तारिफीयां
मुझे नहीं पता
इस इल्म में
कितना कामयाब रहा मैं
पर जमाने की मानें तो
अदाकारी में महारत
और तुम्हारी माने तो
गया गुजरा ,,,,,,,,।

