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Dr Jogender Singh(jogi)

Tragedy

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Dr Jogender Singh(jogi)

Tragedy

आरम्भ

आरम्भ

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देख कर, फेर लिया करो नज़रे,

मिलने के ज़माने गुज़र चुके।


घूमते थे, डाले बांहों में बांहे,

जिस हरियाले पेड़ के पास,

उसके सारे पत्ते, पीले पड़ चुके।


ख़्वाबों में आने की भी 

मनाही है तुम को।

कि अब सोना छोड़ चुके।


काला ही काला है अब,

भुला दिया बाकी सब।

सतरंगी यादों की, दुनिया तोड़ चुके।



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