आओ साथ चलें
आओ साथ चलें
आओ साथ चले वहां तक साथी
जहाँ तक सारी राहें ख़त्म न हो
मिले या न मिले मंजिल फर्क़ क्या
तलाश हमारा कभी खत्म न हो।।
खुशी कुछ कम है कुछ ज्यादा गम है
ज़िंदगी तो साथी दोनों का संगम है
गम बांट लेंगे खुशी छांट लेंगे
शिलशिला ये साथी कभी ख़त्म न हो।।
अनजाना सफ़र हो बेगाना डगर हो
कदम बढ़ाना कितना दूभर हो
तेरा साथ हो गर सफ़र कट जाएंगे
प्यार का हमारा डगर खत्म न हो।।
हर मुश्किल को आसाँ कर देंगे
मुस्कानों में नशा निशाँ भर देंगे
आशा निराशा को एक ही रंग में
रंगीं करने का ढंग खत्म न हो।।

