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Dr Baman Chandra Dixit

Romance

4  

Dr Baman Chandra Dixit

Romance

आओ साथ चलें

आओ साथ चलें

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आओ साथ चले वहां तक साथी

जहाँ तक सारी राहें ख़त्म न हो

मिले या न मिले मंजिल फर्क़ क्या

तलाश हमारा कभी खत्म न हो।।


खुशी कुछ कम है कुछ ज्यादा गम है

ज़िंदगी तो साथी दोनों का संगम है

गम बांट लेंगे खुशी छांट लेंगे

शिलशिला ये साथी कभी ख़त्म न हो।।


अनजाना सफ़र हो बेगाना डगर हो

कदम बढ़ाना कितना दूभर हो

तेरा साथ हो गर सफ़र कट जाएंगे

प्यार का हमारा डगर खत्म न हो।।


हर मुश्किल को आसाँ कर देंगे

मुस्कानों में नशा निशाँ भर देंगे

आशा निराशा को एक ही रंग में

रंगीं करने का ढंग खत्म न हो।।



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