Kavi Ankit Prasoon
Classics
अपने तो ख्याब ओरो को दिखाये नहीं जाते
खुद के तो दर्द ओरो मे सझाये नहीं जाते।
तुम अपने आसुओं को कितना भी पोंछ लो
आंखों के अश्क कभी भी छिपाये नहीं जाते।
आंसू
तुम्हें मालूम...
इजहार
चाहत
वरना तुम हाथे...
हमारे हाथ में...
मोहब्बत
सम्मान
सुहाने सपने
निमंत्रण
स्वागत करने कुसुमाकर का प्रकृति ने भेष धरा अदभुत। स्वागत करने कुसुमाकर का प्रकृति ने भेष धरा अदभुत।
सबने अपने -अपने कर्मो से, जीवन -यज्ञ को महायज्ञ बनाया। सबने अपने -अपने कर्मो से, जीवन -यज्ञ को महायज्ञ बनाया।
अपनी कुंठाएं अनंत व्योमकेश! हम हो न सकते...... अपनी कुंठाएं अनंत व्योमकेश! हम हो न सकते......
दुश्मन भी उसे लगते अपने "पूर्णिमा " पूर्ण करता सपने। दुश्मन भी उसे लगते अपने "पूर्णिमा " पूर्ण करता सपने।
सूर्य देव अब आ गए, लेकर देखो भोर।। सूर्य देव अब आ गए, लेकर देखो भोर।।
माँ की ममता को तड़फा कर नजर फेर कर कहाँ गए तुम।। माँ की ममता को तड़फा कर नजर फेर कर कहाँ गए तुम।।
शिव चरणों में ध्यान लगाओ शिव नाम अमृतवाणी, जन्म सफल है उसका जिसने शिव महिमा है जानी। शिव चरणों में ध्यान लगाओ शिव नाम अमृतवाणी, जन्म सफल है उसका जिसने शिव महिमा ह...
इन अहसासों को कोई तो अब नाम दीजिए फूल है गुलाब का बस थाम लीजिए.... इन अहसासों को कोई तो अब नाम दीजिए फूल है गुलाब का बस थाम लीजिए....
पीकर भंग अपने टोली संग नाचे शिव औघड़ ! पीकर भंग अपने टोली संग नाचे शिव औघड़ !
हमने भी उनकी ख़ुशी के खातिर दर्द जमाने भरका दिलमे दबा लिया। हमने भी उनकी ख़ुशी के खातिर दर्द जमाने भरका दिलमे दबा लिया।
तुम पावस, मैं सारंग हूं बोलो तुम्हारे बिना मैं कहां हूं ? तुम पावस, मैं सारंग हूं बोलो तुम्हारे बिना मैं कहां हूं ?
इनसे रस्में वफा क्या निभेगी शमा हम भी ऐसों को यूं छोड़ कर चल दिए। इनसे रस्में वफा क्या निभेगी शमा हम भी ऐसों को यूं छोड़ कर चल दिए।
सानियत का चेहरा अब खोते चले जा रहे हैं ! सानियत का चेहरा अब खोते चले जा रहे हैं !
ज़िन्दगी में निरंतर चलते जाना, आगे बढ़ते जाना ही सम्मान है। ज़िन्दगी में निरंतर चलते जाना, आगे बढ़ते जाना ही सम्मान है।
फिर से मंज़िल पाने की हमने ख्वाहिश की। फिर से मंज़िल पाने की हमने ख्वाहिश की।
मेरी जान, मेरा मान, शान व पहचान प्यारा हिन्दुस्तान। मेरी जान, मेरा मान, शान व पहचान प्यारा हिन्दुस्तान।
जिस रंग की औड़ायी तूने उसी रंग की मैंने अपनायी ज़िंदगी। जिस रंग की औड़ायी तूने उसी रंग की मैंने अपनायी ज़िंदगी।
देती है सब फल-फूल अन्न पावन धरती यह हिन्द हिन्द। देती है सब फल-फूल अन्न पावन धरती यह हिन्द हिन्द।
हो प्रसन्न जब प्रभु तब ही केवल हास है। तुम्हारी प्रसन्नता को हमारा है पुन: नमन।। हो प्रसन्न जब प्रभु तब ही केवल हास है। तुम्हारी प्रसन्नता को हमारा है पुन: नम...
हर दिन यहां उत्सव मनाते, गर्व से कहते ये मेरा हिन्दुस्तान है। हर दिन यहां उत्सव मनाते, गर्व से कहते ये मेरा हिन्दुस्तान है।