Kavi Ankit Prasoon
Classics
अपने तो ख्याब ओरो को दिखाये नहीं जाते
खुद के तो दर्द ओरो मे सझाये नहीं जाते।
तुम अपने आसुओं को कितना भी पोंछ लो
आंखों के अश्क कभी भी छिपाये नहीं जाते।
आंसू
तुम्हें मालूम...
इजहार
चाहत
वरना तुम हाथे...
हमारे हाथ में...
मोहब्बत
सम्मान
सुहाने सपने
निमंत्रण
खुशियों का ठिकाना होता है वहां जहा पूरा अपना परिवार हो... खुशियों का ठिकाना होता है वहां जहा पूरा अपना परिवार हो...
युगों-युगों तक रहेगा जीवित हर मानव मे कण-कण सा। युगों-युगों तक रहेगा जीवित हर मानव मे कण-कण सा।
माँ मेरी महान है जीवन का देती ज्ञान है। माँ मेरी महान है जीवन का देती ज्ञान है।
वरना आया राम गया राम कहकर सिर्फ. हाथ मलना होगा। वरना आया राम गया राम कहकर सिर्फ. हाथ मलना होगा।
कोई देेेेखने वाला नहीं है, अगर हो जाऊं बीमार। समाप्त। कोई देेेेखने वाला नहीं है, अगर हो जाऊं बीमार। समाप्त।
सुदामा ने सच्चा दोस्त जिसमें पाया सुदामा ने सच्चा दोस्त जिसमें पाया
फिर से चलना शुरु कर, 'तेरी मंजिल की ओर। फिर से चलना शुरु कर, 'तेरी मंजिल की ओर।
तुम हो कृपाल... तुम हो त्रिकाल...!!! तुम्हारी जय हो,जय हो... हे महाकाल...! तुम हो कृपाल... तुम हो त्रिकाल...!!! तुम्हारी जय हो,जय हो... हे महाकाल....
गुलाबी रंग, प्यार का प्रतीक, स्त्रियों का, सबसे प्यारा। गुलाबी रंग, प्यार का प्रतीक, स्त्रियों का, सबसे प्यारा।
ढलती हुई शाम बुढ़ापा ही तो है उगता हुआ सूरज अगर बचपन है तो। ढलती हुई शाम बुढ़ापा ही तो है उगता हुआ सूरज अगर बचपन है तो।
हर किसी की इच्छा, हम भी स्वाद चखें। हर किसी की इच्छा, हम भी स्वाद चखें।
इस भटके हुए मुसाफ़िर की तुम अंतिम मंज़िल और आखिरी तलाश बनोगी क्या ? इस भटके हुए मुसाफ़िर की तुम अंतिम मंज़िल और आखिरी तलाश बनोगी क्या ?
जग हुआ महान मुग्ध आसमान सूर्य के प्रताप से तिमिर तेज ताप से। जग हुआ महान मुग्ध आसमान सूर्य के प्रताप से तिमिर तेज ताप से।
बहन को देता वचन, जब भी कभी याद करोगी, भाई को पास पाओगी। बहन को देता वचन, जब भी कभी याद करोगी, भाई को पास पाओगी।
उनका नाम है श्री 'नील माधव पंडा ... वो ज़मीन पर पडी राख को, आसमां पर रखता है .. उनका नाम है श्री 'नील माधव पंडा ... वो ज़मीन पर पडी राख को, आसमां पर रखता है ....
प्रथम जन्म लिया मंधाता ने, देवराज सुरेश को पराजित किया। प्रथम जन्म लिया मंधाता ने, देवराज सुरेश को पराजित किया।
टन ने ग्रेविटी का सिद्धांत गढ़ा था ! टन ने ग्रेविटी का सिद्धांत गढ़ा था !
समय की साथ बदलते रहे तमन्ना, मिले न मिले, दिल भूल जाते है चहना समय की साथ बदलते रहे तमन्ना, मिले न मिले, दिल भूल जाते है चहना
कहत कबीर दीन हीन पर रहे दया, मिले समाज का साथ। कहत कबीर दीन हीन पर रहे दया, मिले समाज का साथ।