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Sudha Adesh

Tragedy


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Sudha Adesh

Tragedy


आक्रोश

आक्रोश

1 min 162 1 min 162


दिलों में बंद आक्रोश

जब निकलेगा 

चिंगारी उड़ेगी ही

तुम जलो या मैं

फ़र्क़ क्या पड़ता है ।


फ़र्क़ क्या पड़ता है

जब आदमी ही आदमी के 

ख़ून का हो जाये प्यासा

ख़ून बन जाये पानी ।


ख़ून बन गया है पानी

तभी दरिंदगी पर 

दहशतगर्दों की

ख़ून नहीं खौलता ।


ख़ून खौले भी तो 

भला खौले कैसे

जब हम आस-पास की 

दुनिया से बेख़बर 

अपनी ही दुनिया में 

रम गये हैं ...।


दर्द दूसरों का

देता नहीं दिखाई

निज स्वार्थ में

होकर अंधे

कहीं हैवान

तो नहीं हो गए!








सुधा आदेश


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