STORYMIRROR

Akanksha Rao

Drama Inspirational

5.0  

Akanksha Rao

Drama Inspirational

आकांक्षा

आकांक्षा

1 min
958


दयावान हे प्रभु जी मेरे

दे दो मुझको एक वरदान

एक कन्या के रूप में

प्रदान करो मुझे जीवनदान।


कोख में मैं मारी न जाऊँ

इस धरती पर जन्म मैं पाऊँ

ऐसी है एक इच्छा मेरी

ढेरों खुशियां बाँट मैं पाऊँ।


मुझको भी लाड़ प्यार मिले

परिवार का साथ मिले

बोझ न मुझको समझे कोई

मुझे भी कुल का दीप कहें।


औरों की तरह पढ़ने मैं जाऊँ

मैं भी खुब नाम कमाऊँ

खुद के पैरों पर खड़ी होकर

औरों को भी संम्भाल मैं पाऊँ।


माता पिता के बुढ़ापे का

सहारा मैं भी बनना चाहूँ

ढेरों अच्छे कारनामों से

उनकी मैं आकांक्षा बन जाऊँ।


जग में मेरा भी नाम हो

मेरे पास आत्मसम्मान हो

फूल बनकर भले मैं रहूँ

पर समय पर काँटा बन मैं सकूँ।


दहेज न दे पाने के कारण

मारी, जलाई, तड़पाई न जाऊँ

हर एक जन्म में कन्या बनकर

इस धरती पर जन्म मैं पाऊँ।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama