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Classics
जीवन की हक़ीक़त
कुछ यूं बदल गई है,
कि हम खुद को ढूंढने में
व्यस्त हो गए हैं।
समय ही नहीं निकाल पाते
कि आपको ढूंढे,
पर आप भी क्या वक़्त के
मोहताज हो गए हैं।
कोई था/है
हक़
कायल
गुमनाम
मौजूदगी
किसी रोज़
तुम
आवाज़
हक़ीक़त
बदलाव
तृप्ति अतुल्य दुनिया से बेखबर है ये दुनिया रिश्ता जहाँ मे ये इक अमूल्य। तृप्ति अतुल्य दुनिया से बेखबर है ये दुनिया रिश्ता जहाँ मे ये इक अमूल्य।
जिनकी जड़ें जितनी गहरी होती है, वो पेड़ उतनी ही घनी छाँव देती है पनाह पाती जिंदगी एक-एक कर चले ... जिनकी जड़ें जितनी गहरी होती है, वो पेड़ उतनी ही घनी छाँव देती है पनाह पाती जि...
तजुर्बा तो आ जाता है समय के साथ कर्म करते करते खुद-ब-खुद।। तजुर्बा तो आ जाता है समय के साथ कर्म करते करते खुद-ब-खुद।।
निवेदन नहीं किया घोंसला जब बनाया बया ने । निवेदन नहीं किया घोंसला जब बनाया बया ने ।
जीवन की इस आपाधापी में फिर कैसे ढूँढते खुद का ही बचपन है। जीवन की इस आपाधापी में फिर कैसे ढूँढते खुद का ही बचपन है।
संघ के पथ पर चलने कबसे उत्सुक थी। संघ के पथ पर चलने कबसे उत्सुक थी।
समझ में आ जाए जो बात लिख देता हूं सरल शब्दों में। समझ में आ जाए जो बात लिख देता हूं सरल शब्दों में।
कागज़ की कश्तियाँ थी जहाँ जहाँ प्रकाश भी मिट्टी वाला था। कागज़ की कश्तियाँ थी जहाँ जहाँ प्रकाश भी मिट्टी वाला था।
दम तोड़ने से पहले दीया, फड़फड़ाता जा रहा है ! दम तोड़ने से पहले दीया, फड़फड़ाता जा रहा है !
किसी के जाने से सासे नहीं रूकती जिंदगी है जो किसी तरह चल रही है। किसी के जाने से सासे नहीं रूकती जिंदगी है जो किसी तरह चल रही है।
वीर जवानों ने दिया बलिदान, तभी तो यह देश है इतना माहान। वीर जवानों ने दिया बलिदान, तभी तो यह देश है इतना माहान।
फिर क्या भरोसा फिर मिले मुझे मधुभाषी। फिर क्या भरोसा फिर मिले मुझे मधुभाषी।
चलो सबका साथ सबका विकास हो आओ रोटी के टुकड़े का ही अनुबंध करते हैं। चलो सबका साथ सबका विकास हो आओ रोटी के टुकड़े का ही अनुबंध करते हैं।
शीघ्र हृदय से पढ़ ले तू समुद्र से मेरी चाहत। शीघ्र हृदय से पढ़ ले तू समुद्र से मेरी चाहत।
वैराग्य, आत्मचिंतक बन नरहरिदास के अनुगामी हुए । वैराग्य, आत्मचिंतक बन नरहरिदास के अनुगामी हुए ।
कटाई, बुनाई के खेत-खलिहान कण-कण में स्थिरता का वास। कटाई, बुनाई के खेत-खलिहान कण-कण में स्थिरता का वास।
सर्द की रात में उसकी याद भी अलाव सी हो जाती है वो खयालों में आती है जुनूँ सी पिघल जाती है, उसकी ... सर्द की रात में उसकी याद भी अलाव सी हो जाती है वो खयालों में आती है जुनूँ सी ...
इस इश्क़ ने जैसे हमें कोई मुजरिम बना रखा है ! इस इश्क़ ने जैसे हमें कोई मुजरिम बना रखा है !
हमको दुनिया से बेगाना किस पर करें भरोसा अपने ही हो जाएं जब बेवफा। हमको दुनिया से बेगाना किस पर करें भरोसा अपने ही हो जाएं जब बेवफा।
रावण परम ज्ञानी था पर अभिमानी था। रावण परम ज्ञानी था पर अभिमानी था।