STORYMIRROR

Rahulkumar Chaudhary

Drama Tragedy Inspirational

4  

Rahulkumar Chaudhary

Drama Tragedy Inspirational

आनंद सुख दुःख

आनंद सुख दुःख

1 min
311

दुःख उधार का है,आनन्द स्वयं का है।

आनन्दित कोई होना तो अकेले भी हो सकता;


दुखी होना चाहे तो दूसरे की जरूरत है।

कोई धोखा दे गया; किसी ने गाली दी

कोई तुम्हारे मन की अनुकूल न चला- सब

दुःख दूसरे से जुड़े है।


और आनन्द का दूसरे से कोई सम्बन्ध नहीं है। 

आनन्द स्वस्फूर्त है दुःख बाहर से आता है,

आनन्द भीतर से आता है तू ही तू।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama