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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

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Ganesh Chandra kestwal

Inspirational

आजादी

आजादी

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आजादी का जश्न मनाने, पहना सबने बाना है।

मन से पूछो मूल्य कभी क्या, आजादी का जाना है॥ 


बलिदानी वीरों ने इसको, देवी के सम माना था।

रक्त रूप चंदन से इसका, रोम-रोम हर्षाना था।

हम सब की प्रतिष्ठा है यह, उर में इसे बसाना है। 

मन से पूछो मूल्य कभी क्या, आजादी का जाना है॥ 


पुत्र चढ़ाए माताओं ने, जिन्हें प्यार से पाला था। 

अश्रु पी लिए खुद ही अपने, घर का बुझा उजाला था।

मातृशक्ति ने बलिवेदी पर, आँचल अपना ताना है।

मन से पूछो मूल्य कभी क्या, आजादी का जाना है॥ 


सूनी माँग असंख्य हुई थीं, भाग्य जिन्होंने खोया था।

प्रस्तर बना हृदय था उनका, तनिक भी वह नहीं रोया था।

त्याग शृंगार, भाग्य संतति, उनको स्वयं रचाना है।

मन से पूछो मूल्य कभी क्या, आजादी का जाना है॥


अत्याचार कठोर देखकर, कालकोठरी रोई थी।

लौह शृंखला में बँधकर ही, वीर जवानी सोई थी।

नहीं मिला खाने को उनको, कभी पेट भर दाना है।

मन से पूछो मूल्य कभी क्या, आजादी का जाना है॥


स्वतंत्रता की दिव्य धरोहर, पूर्व जनों ने सौंपी है। 

भारत वीर सपूतों ने जो, बलिदानों से मापी है।

उसकी रक्षा में हम सबको, अपना फर्ज निभाना है।

मन से पूछो मूल्य कभी क्या, आजादी का जाना है।


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