STORYMIRROR

Dr. Akshita Aggarwal

Abstract Tragedy Thriller

4  

Dr. Akshita Aggarwal

Abstract Tragedy Thriller

आग

आग

1 min
612

जगह-जगह जलती रहती है यह आग।

कहीं बनकर दहेज की आग तो,

किसी के सीने में धधक रही है बनकर बदले की आग।

सबसे ज़्यादा खतरनाक होती है नफ़रत की आग।


कभी-कभी एक आग का,

इलाज भी बन जाती है दूसरी आग।

जैसे, पेट की आग बुझाती है।

हमेशा चूल्हे की आग।


कभी पानी की बूंँद बुझाती है आग।

और एक है ऐसी बूंँद जो,

बुझा देती है सबसे खतरनाक आग।

जिसे कहते हैं नफ़रत की आग।


प्यार की बूंँद है ही ऐसी जो,

बुझा सकती है सिर्फ़ नफरत की ही नहीं,

बल्कि कोई भी आग।

बड़ी से बड़ी आग।


जगह-जगह जलती रहती है यह आग।

कहीं बनकर दहेज की आग तो,

किसी के सीने में धधक रही है बनकर बदले की आग।

सबसे ज़्यादा खतरनाक होती है नफ़रत की आग।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract