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Ashish Mishra

Abstract Inspirational

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Ashish Mishra

Abstract Inspirational

याद आता है …

याद आता है …

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बीता हुआ हर एक समंदर याद आता है 

      मुझको मेरा बचपन बराबर याद आता है 


  वो जहाँ सीखा बहुत कुछ यार थोड़े में

      हमको हमारा पल वो सुंदर याद आता है 


  चाहे नया मैं आज हूँ, पर पुराना है ढका

      बाहर यथा मैं भूल जाऊँ, अंदर याद आता है 


  आज मुझमें है चमक कुछ लोग कहते हैं 

       परंतु मुफ़लिसी का बवंडर याद आता है 


  वो तालाब, वो नदी जो कभी बाढ़ में बही

     कभी उस गाँव के ऊपर का अम्बर याद आता है 

     

  आशीष देकर चल दिए जिस माह माँ-बापू

       सच में वो नवम्बर-दिसंबर याद आता है 


  बीता हुआ हर एक समंदर याद आता है 

        मुझको मेरा बचपन बराबर याद आता है 



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