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Afsana Wahid writes Wahid

Abstract

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Afsana Wahid writes Wahid

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तेरी याद

तेरी याद

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याद जब आते हो तुम।

तो जिस्म से जान ले जाते हो तुम।


होती है बेचैनी इस दिल को मेरे।

इतना क्यों बेबस कर जाते हो मुझे तुम।


उठते हैं जब जब तेरी यादों के सैलाब इस दिल में।

मेरा जीना भी हो जाता है मुश्किल में।

याद तेरी ऐसा दर्द देने लगी है मुझे अब।

जीना भी दुश्वार होने लगा है अब।


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