STORYMIRROR

अख़लाक़ अहमद ज़ई

Inspirational Others

4  

अख़लाक़ अहमद ज़ई

Inspirational Others

आदत

आदत

1 min
244

मत करो

एहसान मुझ पर कि

उपकार का दंभ आने वाली पीढ़ियाँ ढोयें

मत लो एहसान कि

मुझे अपने एहसानों का इतिहास लिखना पड़े

और हमारे बच्चे भी

उस इतिहास का व्यापार करें

जो हमारी-तुम्हारी 'अंह' की सन्तान हों

फिर दुनिया उन दोनों के 

ताल्लुक़ात में क़यामत के आसार ढूंढे

या फिर ऐसे ही/ जैसे

हम-तुम एक दूसरे को

इल्ज़ाम देते रहे

फिर आओ चलें दोस्त बन

उस विद्युत शवगृह तक

कम से कम बच्चों को 

हड्डियां पहचानने की आदत तो नहीं पड़ेगी। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational