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Rekha Verma

Abstract

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Rekha Verma

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आधा चांद और अधूरी इच्छा

आधा चांद और अधूरी इच्छा

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नींद अधूरी ख्वाब अधूरा 

अधूरा अधूरा सा ये चांद है

मन की इच्छाएं भी रह गई अधूरी

यह कैसा ईश्वर का वरदान है



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