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Madhu Vashishta

Action Inspirational

4  

Madhu Vashishta

Action Inspirational

4) पेंटिंग बाय न्यारा जैन।(31)

4) पेंटिंग बाय न्यारा जैन।(31)

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आज सब को आजादी चाहिए।

किसी को पसंद नहीं कछुए के खोल के जैसे बंधन में रहना।

पारिवारिक बंधन, सामाजिक बंधन, सांस्कृतिक बंधन

से सबको छुटकारा चाहिए।

आसमान तक सब उड़ना चाहते हैं।

कछुए भी अपना पारंपरिक खोल उतारकर फेंकना चाहते हैं।

वह भी पंछियों के जैसे आकाश में उड़ना चाहते हैं।

बिना किसी खोल के बारिशों में झूमना चाहते हैं।

किसने सिखाया है उनको?

किसने बताया है उनको?

परंपरा और लीक से हटकर

चलने के लिए किसने बहकाया है उनको?

यह केवल खोल नहीं है यह है उनका सुरक्षा कवच!

वह अपने कवच में छुप जाते हैं आंधी में, बरसात में, तूफान में,

या किसी भी बुरे हालात में।

खोल जैसे सुरक्षा कवच के हटने के बाद वह क्या कर पाएंगे?

कैसे सुरक्षित रह पाएंगे।

आज जो इन्हें बंधन लग रहा है इस बंधन से मुक्त होने के बाद

वह आजादी से कैसे जी पाएंगे?

परेशान है मन, कैसे उन्हें समझाएं।

खोल की जरूरत और उसकी कीमत के बारे में कैसे उन्हें बताएं?

बिना कोई बंधन के आजादी नहीं होती।

उच्छृंखलता की कोई सीमा नहीं होती।

जरूरी है बंधन और संस्कार भी।

सब को समझना होगा यह जरूर ही।


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