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ज़मीन गुज़रे लम्हों के दोबारा पन्ने खोल रही हूँ मैं तोल मिट्टी निजाम सत्ता मोल सबह किताबों पहचान बदलना ताकत अनमोल हिन्दीकविता अनुसार बक्सा बाजार अपने उड़ collegwritingchallenge

Hindi खोल Poems