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मवाना टॉकीज  भाग 12
मवाना टॉकीज भाग 12
★★★★★

© Mahesh Dube

Action Thriller

3 Minutes   7.1K    12


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वह अमावस्या की रात थी। वातावरण में घुप्प अन्धेरा पसरा हुआ था। झाड़ियों में छुपे सोमू की आँखें मवाना टॉकीज पर जमी हुई थी। वातावरण में झींगुरों के स्वर के अलावा और कोई आवाज नहीं हो रही थी। अचानक टॉकीज की ऊपरी मंजिल से एक प्रकाश रेखा उभरी और तीन बार जली बुझी। थोड़ी देर में एक मिनी ट्रक धीमे से चलता हुआ परिसर में आ खड़ा हुआ। उसमें से कुछ साये उतरे और निःशब्द टॉकीज में प्रविष्ट हो गए। फिर थोड़ी देर बाद वे साये सिर पर बोरियाँ लिए बाहर निकले और ट्रक में लोड करके फिर भीतर चले गए। सोमू अब दबे पांव बाहर निकला और ट्रक में चढ़ गया। उसने बोरियों के बीच छुपने की जगह बना ली। इस बीच वे साये और बोरियाँ लोड कर गए। सोमू ने एक बोरी टटोली तो उसे किसी इंसानी शरीर का आभास हुआ। उसने जल्दी से एक बोरी का मुंह खोला तो एक बेहोश बच्चे का सिर बाहर लटक आया। उसके मुंह से सिसकारी निकली। इस बीच अचानक बोरी लादने आये एक काले साये ने उसे देख लिया और वह जोर से चिल्लाया तो फौरन दो तीन लोगों ने आकर सोमू को पकड़ लिया और रुई की तरह धुनने लगे फिर उसे उठाकर मवाना टॉकीज में ले गए और नीचे भूमि पर पटक दिया। वहां एक लगभग पचपन साल का बलिष्ठ सा आदमी निर्देश दे रहा था। उसने सोमू को देखते ही लपक कर एक लात जमाई और बोला, कुत्ते! आज तू ज़िंदा नहीं बचेगा। नाक में दम कर रखा है। इतना कहकर उसने एक इशारा किया। एक कम उम्र की औरत जो उसके साथ खड़ी थी वह एक फरसेनुमा हथियार ले आई। उस आदमी ने जैसे ही फरसा उठा कर सोमू को मारने के लिए ताना, एक फायर हुआ और एक गोली आकर उसकी छाती से टकराई। वह चीख मारकर पीछे को उलट गया। अँधेरे में से एक साया रिवाल्वर को फूंक मारता बाहर निकला, और बोला, हैंड्स अप! कोई भी हिला तो गोली मार दूंगा। जब वह रौशनी के दायरे में आया तो सोमू ने देखा कि यह इंस्पेक्टर अभय था। उसने ईश्वर का धन्यवाद देने के लिए आँखें मूँद ली। सभी मजदूरों ने हाथ उठा दिए। अब अभय ने जेब से निकाल कर एक सीटी बजाई। उस नीरवता में वह आवाज जोर से गूंजी। तत्काल सारा परिसर शक्तिशाली सर्चलाइटों की रौशनी से नहा गया और काफी पुलिस वाले वहाँ टूट पड़े। सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। गोली खाकर गिरे आदमी को गोली घातक जगह नहीं लगी थी उसे अस्पताल भेज दिया गया। ट्रक में लदे सभी बोरों में बेहोश बच्चे थे केवल उस एक बोरे को छोड़कर जिसमें से बेहोश डॉ चटर्जी निकले। पुलिस सभी को लेकर थाने चली गई जहाँ अगले दिन इन सभी बातों का रहस्य खुलना था।

भुतही कहानी

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