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डेथ वारंट भाग 11

डेथ वारंट भाग 11

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बॉस के मुंह से एक दर्दनाक चीख निकली,उसने अपने दूसरे हाथ से जख्मी कलाई थाम ली जिसपर हिप्पी द्वारा चलाई गई गोली आ लगी थी। उसका रिवाल्वर हवा में उछल कर अदृश्य हो गया था। इरफान अपनी निश्चित मृत्यु को टलता देख अचंभित था। हिप्पी अपनी आड़ से बाहर निकल आया। उसने पिस्तौल के निशाने पर दोनों को ले रखा था। 

कौन हो तुम ? नकाबपोश के मुंह से निकला। तेरी मौत हूँ बॉस के पिल्ले, कहकर हिप्पी ने अपनी विग,चश्मा और नकली मूंछे निकाल फेंकी।
सालुंखे ??? दोनों के मुंह से निकला।
हाँ ! मैं ! सालुंखे दहाड़कर बोला,तेरे कुत्ते ने उस दिन माहिम दरगाह के सामने निशाना गलत लगाया और कल हॉस्पिटल में भी अपनी शर्ट की फैंसी बटन छोड़ आया था जो मुझे मिल गई थी।
इतना कहकर सालुंखे ने जेब से एक बटन निकाल कर इरफान की ओर फेंक दी। यह बटन कुछ स्पेशल और आम बटन से दुगने आकार की थी। आदतन सज धज कर रहने वाला इरफान कुछ अलग तरह के ही कपड़े पहनता था। उसका चेहरा लटक गया।
बॉस की आंखें अंगार उगलने लगीं।वह फुफकार कर बोला, देखा कुत्ते ! तू कितना लापरवाह है ? यह तेरे पीछे यहाँ तक पहुंच गया और तुझे खबर तक नहीं हुई। बॉस के हाथ से खून बह रहा था पर उसे इसकी कोई परवाह नहीं लग रही थी। उसने चुपचाप अपना रुमाल निकाल कर कलाई पर लपेट लिया।
सालुंखे ध्यान से उसे ही देख रहा था ,वह उसकी चाल में फंस गया। उसे पता ही नहीं चला कि बाहर जिस बुजुर्ग चौकीदार को वह बेहोश करके छोड़ आया था वह ज्यादा सख्तजान निकला था और आशा के विपरीत जल्दी होश में आ गया था। इधर नकाबपोश ने सालुंखे का ध्यान बंटाए रखा उधर बुढऊ ने आकर मेन स्विच बन्द कर दिया। गोदाम में घुप्प अंधेरा छा गया।
सालुंखे ने अनुमान से नकाबपोश की दिशा में छलांग लगा दी। उसकी पकड़ में उसका कोट आ गया लेकिन वह बड़ी चपलता से झुकाई देकर मोखले में कूद पड़ा। सालुंखे भी उसी गड्ढे में कूद गया। अब उसे अपनी जान की परवाह नहीं थी। वह किसी भी कीमत पर बॉस को छोड़ना नहीं चाहता था। उसकी आँखों के सामने वे अनेक बेगुनाह घूम रहे थे जो बॉस के कारण जान गंवा चुके थे।


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