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Mahesh Dube

Thriller


2.4  

Mahesh Dube

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बुरा फंसा जासूस भाग 5

बुरा फंसा जासूस भाग 5

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बेटा जासूस की दुम! शैलेश क्रूर शब्दों में चबा-चबा कर बोला, विपिनचंद्र मालपानी की कोई बेटी है ही नहीं। उसका एक ही बेटा है जो अभी अमेरिका में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है और उसने झपट कर सोमनाथ का गिरेबान थाम लिया और जोर-जोर से झिंझोड़ता हुआ बोला, जल्दी सच उगल दे साले! वर्ना ऐसी दुर्गति करूँगा कि तेरी सात पुश्तें जासूसी के नाम से कांपेंगी। 

हे भगवान! ऐसा कैसे हो सकता है? सोमनाथ बड़बड़ाया, सर ये तो मुझे फंसाने की चाल लगती है। मैं ईश्वर की कसम खाकर कहता हूँ कि अंतरा मालपानी नामक लड़की मुझसे मिलने आई थी उसने मुझे विकास की जांच करने का काम दिया और पचास हजार रूपये एडवांस भी दिए।

वो पैसे कहां हैं? शैलेश बोला

मेरे ऑफिस की दराज में रखे हैं सर ! पांच सौ के नए नोटों की गड्डी है।  

चल! शैलेश बोला और सोमनाथ का हाथ पकड़कर बाहर ले आया। सोमनाथ के ऑफिस पहुंचकर दराज खोली गई तो उसमें कोई नोटों की गड्डी नहीं मिली। सोमनाथ के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। 

हे भगवान! मैंने सुबह ही इस दराज में गड्डी रखी थी। यह मुझे फंसाने की चाल है सर! वह रोनी आवाज में बोला।

शैलेश पवार ने चुपचाप सोमनाथ का कॉलर पकड़ा और उसे धकेलता हुआ बाहर को ले गया। अब वह कुछ सुनने के मूड में नहीं था। 

सर! सर! एक मिनट, सुबह जब वो आई थी तब चायवाले बंडू ने हमें चाय पिलाई थी। आप उसकी टपरी पर चलकर पूछ लीजिये। अभी सच झूठ का पता चल जाएगा, सोमनाथ बोला। 

शैलेश सोमनाथ को साथ लेकर बंडू की टपरी पर पहुंचा। बंडू ने एक बावर्दी अफसर को देखते ही सलाम ठोका। 

तेरा नाम? शैलेश ने रोबदार स्वर में पूछा 

बंडू नवनाथ खरे साब!

कल सुबह तूने साहब को चाय पिलाई थी?

हौ साब! रोज पिलाता है 

कल सुबह जो लड़की को तूने साब के साथ चाय पिलाई थी वो देखने में कैसी थी?

बंडू के चेहरे पर असमंजस के भाव आ गए, मानो उसे शैलेश का सवाल ही न समझ आया हो। 

बाद में शैलेश द्वारा दुबारा पूछे जाने पर बंडू ने ऐसी किसी लड़की को चाय पिलाने की बात से साफ़ इंकार कर दिया। सोमनाथ का मन हुआ कि अपने बाल नोंच ले। आखिर ये क्या हो रहा था? वो ही पागल होता जा रहा था या पूरी दुनिया उसके खिलाफ हो गई थी? 

अरे बंडू भाई! प्लीज ऐसा जुल्म मत करो, कल तुमने सुबह चाय दी थी तब एक फ़िल्मी हीरोइन जैसी लड़की बैठी थी न मेरे ऑफिस में?

नक्को! बंडू ने मजबूती से सिर हिला दिया। तुम अकेला ही था साब! 

अब शैलेश का धैर्य जवाब दे गया। उसने एक जोरदार झापड़ सोमनाथ को रसीद किया और धकेलता हुआ जीप की ओर ले चला। 

अब सोमनाथ के बचने की कोई सूरत नहीं थी। वह पुलिस की कार्यप्रणाली जानता था। अगर पुलिस को तश्तरी में सजा सजाया कातिल मिल रहा था तो वह सबूतों को ढूंढने की कवायद में नहीं पड़ने वाली थी। अब तो उसे सोमनाथ के खिलाफ कुछ सबूत गढ़ने भी पड़ते तो कोई दिक्कत नहीं थी। हर बात सोमनाथ की ही ओर इशारा कर रही थी। लेकिन अंततः सोमनाथ ने शैलेश को चौंका ही दिया। 

 

ऐसा क्या किया सोमनाथ ने ?

पढ़िए भाग 6

 

 


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