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Mahesh Dube

Thriller


0.2  

Mahesh Dube

Thriller


मिशन पाकिस्तान

मिशन पाकिस्तान

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छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आज विशेष भीड़ भाड़ थी। छह दिसम्बर का दिन वैसे भी मुंबई के लिए विशेष होता है क्यों कि आज दलितों के मसीहा भारत रत्न बाबा साहेब अंबेडकर की पुण्यतिथि होने के कारण दूर दूर से लोग यहाँ स्थित चैत्य भूमि पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने आते हैं। इसी दिन बाबरी ढाँचे को तोड़ा गया था अतः हर जगह इस दिन वैसे भी रेड अलर्ट घोषित रहता है। किसी गड़बड़ी की आशंका के मद्देनजर इस दिन सुरक्षा बल अतिरिक्त सावधानी बरतते हैं। जगबीर सिंह सैनी अपनी पूरी वर्दी में मुस्तैदी से खड़े आने वाले यात्रियों की जांच कर रहा था। उसके हाथ में मेटल डिटेक्टर था। सामने लकड़ी के गेट से जैसे ही यात्री गुजरता तो हलकी सी टीं की आवाज आती और सैनी मुस्तैद हो जाता। यात्री वहाँ से होता हुआ सैनी के सामने बने एक छोटे से चबूतरे पर खड़ा हो जाता। नियमित यात्री खुद दोनों बाहें फैला देते तो सैनी उनके बदन पर हर जगह मेटल डिटेक्टर घुमा कर जांचता लेकिन कोई नया यात्री होता तो उसे हाथ फैलाने का संकेत करना पड़ता था। सैनी काफी समय से ड्यूटी पर था और अब थोड़ी थकान महसूस करने लगा था। ड्यूटी ऑफिसर  शिवम शर्मा अपनी चेयर पर बैठा सजगता पूर्वक एक्स-रे मशीन से सभी बैग्स की जांच कर रहा था। शिवम असल में रॉ का जासूस था और एक इमरजेंसी के रूप में यहाँ ड्यूटी दे रहा था। अचानक उसने देखा कि एक लंबा चोंगा पहने दाढ़ी वाला आदमी थोड़ा लंगड़ाता हुआ चल रहा है। उसके हाव भाव संदिग्ध लग रहे थे। शिवम ने अपने अफसर नारायण रहेजा की तरफ देखा और उनका इशारा पाते ही जल्दी से अपनी एक्स-रे मशीन के संचालन को रोका और झपट कर उस कतार की ओर दौड़ा जहाँ वह संदिग्ध धीमे धीमे सरकता हुआ जगबीर सैनी की तरफ बढ़ रहा था। अचानक चोंगे वाले आदमी को शिवम की भनक लग गई। वह तेजी से उस दिशा की ओर लपका जहाँ बहुत सारे लोग बोर्डिंग पास लेकर खड़े थे। शिवम ने खतरे को भांपते हुए अपनी सर्विस रिवाल्वर निकाल ली और उसे चेतावनी देते हुए दौड़ने लगा। उधर जगबीर सैनी ने भी खतरा भांपते हुए छलांग लगाई लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चोंगे वाला भारी भीड़भाड़ तक नहीं पहुंच सका पर उसने अपने पेट के पास कोई बटन दबा दिया। उसने अपने शरीर पर जिलेटिन की छड़ें बाँध रखी थी। जिनमें भयानक विस्फोट हुआ। जगबीर सिंह सैनी सहित अनेक लोगों के बदन के परखच्चे उड़ गए। शिवम विस्फोट के वेग से दूर जा गिरा और उसकी चेतना लुप्त हो गई। 

 अस्पताल के अपने बेड पर पड़े शिवम को जब होश आया तब उसे वस्तुस्थिति समझने में थोड़ी देर लगी। उसके बाएं बाजू पर कच्चा पलस्तर चढ़ा हुआ था। माथे पर भी मोटी पट्टी बंधी थी और चेहरे तथा बदन पर असंख्य खरोंचों के निशान थे। उसके एक दो सहकर्मी उसे घेरे खड़े थे। सामने अपने अफसर नारायण को देखते ही उसने अपने दूसरे स्वस्थ हाथ को उठाकर सेल्यूट करने की कोशिश की तो नारायण ने उसका हाथ पकड़ कर मना कर दिया और बोला,अब कैसी तबीयत है शिवम?

अच्छी है सर! शिवम थके स्वर में बोला। क्या जगबीर ठीक है?

हाँ हाँ  एकदम ठीक है। नारायण बोला,लेकिन उसके स्वर का खोखलापन शिवम से छुपा न रह सका।

सच्चाई समझकर शिवम की आँखों में खून उतर आया। 

कसम है मुझे सर! एक एक हत्यारे को चुन चुन के मारूँगा! शिवम उत्तेजना भरे स्वर में बोला। 

जगबीर सैनी का साल भर पहले ही विवाह हुआ था और उसकी मौत ने शिवम को दुखी और क्रोधित कर दिया था। नारायण सांत्वना स्वरूप उसके हाथ को दबाकर कमरे से बाहर निकल आया क्यों कि शिवम को अभी आराम की जरूरत थी। बाहर रमाकांत खड़ा सिगरेट सुलगाने की कोशिश कर रहा था। रमाकांत भी शिवम का सहयोगी था। अपने अफसर को देखते ही उसने तुरंत सिगरेट निकाल कर बुझा दी और सहज दिखने की कोशिश करने लगा। नारायण, रमाकांत के पास आया और बोला, किसी ने घटना की जिम्मेदारी ली?

नहीं सर! रमाकांत बोला,अभी तक तो किसी आतंकी संघटन की ओर से जिम्मेदारी नहीं ली गई है। पता नहीं किसका काम है। 

जल्दी ही चूहे बिल से निकल आएंगे रमाकांत,चिंता मत करो।  

नारायण रहेजा वैसे कहने को तो एयरपोर्ट का सुरक्षा अधिकारी था पर दरअसल वह भारतीय सीक्रेट सर्विस का चीफ था। वह केवल गृहमन्त्री को रिपोर्ट करता था। उसकी एयरपोर्ट अधिकारी की पोस्ट केवल सीक्रेट ऑफिसर की असलियत छुपाने के लिए थी। यहाँ तक कि उसकी पत्नी भी यह नहीं जानती थी कि उसका पति नारायण एक जासूस था।गृहमंत्री बाबूराम सैनी के मन्त्रणा कक्ष में गुप्त मीटिंग में नारायण मौजूद था। आज सुबह ही लश्करे गाजी के चीफ हाजी बाबा ने हवाई अड्डे पर हुए हमले की जिम्मेदारी लेते हुए हिंदुस्तान को और अधिक हमलों के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी थी। हाजी बाबा का पूरा नाम मुनव्वर शेख अब्दुल्ला था जो हिंदुस्तान में ही पैदा हुआ था पर दिल्ली बम धमाकों में नाम जुड़ने के बाद पाकिस्तान भाग गया था और अब वहीं से हिंदुस्तान विरोधी गतिविधियां चलाया करता था। हिंदुस्तान बार बार पाक को सबूत देकर उसके वहाँ होने की बात करता पर पाक सरकार हमेशा सबूत कम या नकली होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेती थी। 

सर! नारायण गला साफ़ करता हुआ बोला, हम यह बात अच्छी तरह जानते हैं कि हाजी कराची में ही छुपा हुआ है तो क्या हमें सर्जिकल स्ट्राइक करके इस मुसीबत को हमेशा के लिए नहीं ख़त्म कर देना चाहिए? 

तुम समझते नहीं हो नारायण, गृहमंत्री बाबूराम सैनी ने समझाया, हम सीधे कराची पर अटैक नहीं कर सकते पाकितान एक संप्रभु और परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र है उसपर हमला हमें अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी में दबाव में ले आएगा। 

लेकिन सर! नारायण बोला, क्या हम छुपकर वार नहीं कर सकते? कोई अकेले के दम पर जाकर हाजी को ठोक दे तो सरकार की जिम्मेदारी कहाँ बनती है? 

पहली बात तो ये कि इतना काबिल और समर्पित व्यक्ति कहाँ मिलेगा जो अकेले दम पर पाकिस्तान में घुसकर हाजी को ढेर कर सके और दूसरे इस काम में सफल होने का चांस बेहद कम है अतः ऐसी अनुमति नहीं दी जा सकती,गृहमंत्री ने हाथ खड़े कर दिए। 

सर! नारायण बोला, मेरे पास एक ऐसा जांबाज मौजूद है जो हर खतरे से खेल सकता है और कठिन से कठिन मिशन पर कामयाब हो सकता है 

कौन है वह? 

शिवम शर्मा नाम है उसका,आजकल एयरपोर्ट पर सुरक्षा अधिकारी के रूप में तैनात है। 

ठीक से सोच लो नारायण,अगर शिवम वहाँ पकड़ा या मारा गया तो सरकार उसकी कोई भी जिम्मेदारी लेने से इनकार कर देगी। अगर यह सिद्ध हो गया कि शिवम हमारा जासूस है तो हमारी बहुत किरकिरी हो सकती है। 

डोंट वरी सर! आई नो माय बॉय! कल उसे लाकर मिलवाता हूँ आपसे! कहकर नारायण ने सेल्यूट किया और चल पड़ा।  

 अगले दिन शिवम और नारायण, गृहमंत्री बाबूराम से मिले। शिवम को देखते ही बाबूराम का सिर इंकार में हिलने लगा।

अरे भाई,ये आदमी तो अभी चलने फिरने लायक भी नहीं लग रहा है ये उधर जाकर क्या करेगा भला? वे बोले। 

सर! आप इसके अवतार पर मत जाइए। हाथ पर कच्चा पलस्तर बंधा है जो इसकी आड़ है। लोग इसे एक बाजू का नाकारा समझेंगे जबकि यह पूरी तरह फिट है। आप कहें तो मैं इसका एक डेमो दिखाऊं? 

ओके, बाबूराम बोले, ऐसा समझो कि तुम लोग मुझे किडनैप करने आये हो! मैं सुरक्षा रक्षकों को बुलाता हूँ। दिखाओ जलवा! कहकर बाबूराम ने मेज के पैनल में लगा बटन दबा दिया। 

पलक झपकते ही केबिन का दरवाजा खुला और कई सशस्त्र गार्ड कमरे में प्रविष्ट हो गए लेकिन उसके पहले ही शिवम बिजली की तेजी से बाबूराम तक पहुंच कर उनकी कनपटी पर रिवाल्वर रख चुका था। एक हाथ पर प्लास्टर बंधे होने के बावजूद उसकी तेजी गृहमंत्री जी को चकित कर गई। 

ओके शिवम! ग्रेट जॉब! कहकर मंत्री जी ने सुरक्षा रक्षकों को जाने का आदेश दिया। वे सब भारी असमंजस में पड़ गए। तब बाबूराम ने उन्हें पूरी बात बताई। शिवम अब शांत होकर अपनी कुर्सी पर बैठा था। सुरक्षा गार्ड विचित्र दृष्टि से शिवम को घूरते हुए चले गए। 

सर! अगर अभी मरने मारने की नौबत भी आ जाती तो मैं सफल हो जाता, शिवम लापरवाही से बोला 

कैसे? आश्चर्य से मंत्रीजी बोल पड़े 

"मेरा जो कच्चा प्लास्टर है उसके भीतर एक पूरी तरह प्लास्टिक से बनी इटालियन गन छुपी हुई है जो किसी मेटल डिटेक्टर की पकड़ में नहीं आ सकती और वह इस तरह सेट है कि मेरी उँगली की एक हरकत से बेआवाज आग उगलने लगेगा, शिवम अपनी बात का प्रभाव देखने के लिए क्षण भर रुका, मंत्रीजी मुंह बाए उसे देख रहे थे, शिवम आगे बोला,अगर मैं अभी फायर करता तो सभी गार्डों की लाशें अभी तक बिछ गई होतीं और उनकी आत्माएं स्वर्ग में चित्रगुप्त से हाय हेलो कर रही होती। 

बहुत खूब शिवम! मंत्री जी बोले,फिर नारायण से मुखातिब हुए,तुमने इसे यह तो बता दिया है न कि असफल होने की सूरत में हम कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे? 

मुझे सब खबर है सर! शिवम बीच में ही बोल पड़ा,आप कोई फ़िक्र न करें। 

फिर गृहमंत्री ने खुद उठकर शिवम की पीठ थपथपाई और बोले, भगवान तुम्हारी रक्षा करें! अब मैं तुमसे तब मिलूंगा जब तुम सफल होकर लौटोगे,भगवान न करे तुम्हें कुछ हो जाए तो तुम्हारे परिवार की पूरी जिम्मेदारी हमारी होगी। लेकिन अगर तुम पकड़े गए तो हम तुम्हारी कोई मदद न कर सकेंगे।

शिवम मुस्‍कुराता हुआ बोला,उसकी नौबत नहीं आएगी सर! मैं कुछ समय में ही हाजी को मारकर आपसे मैडल लेने हाजिर होता हूँ। 

मंत्री जी भी मुस्कुरा उठे और शिवम नारायण के साथ लौट आया अब उसे तुरंत कूच करना था। 

 दो दिन बाद जब शिवम कराची के जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा तो उसका नाम गोपाल बाबू था जो मुम्बई का एक व्यापारी था और उसके पास के कागजात इस बात की पुष्टि करते थे कि वह व्यवसाय के सिलसिले में कराची आया हुआ था। कराची एयरपोर्ट की सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वह बाहर निकला तो एयरपोर्ट पर उसके नाम की तख्ती लिए एक कम उम्र का नौजवान खड़ा था। शिवम ने जाकर उससे हाथ मिलाया। हेल्लो! मैं गोपाल बाबू, मुम्बई 

हेल्लो! वह गर्मजोशी से हाथ हिलाता हुआ बोला, माई सेल्फ मुहम्मद खालिद! आपका सफर कैसा रहा जनाब? 

बहुत बढ़िया रहा खालि!और सुनाओ,मौसम कैसा है कराची का? 

कराची भी आपकी मुम्बई की तरह सागर किनारे बसा है न? तो आपको बिलकुल वही मौसम मिलेगा जनाब! न ठण्ड न गरमी! और वह हंसने लगा। 

शिवम को लड़का पसन्द आया। मुझे रिंग रोड पर कोई कमरा दिलवा दो,मुझे समुन्दर पसन्द है। 

रिंग रोड कराची के सागर तट पर चली गई लंबी सड़क थी जिसपर एधी फाउंडेशन का वो दफ्तर था जिसमें हाजी के आते रहने की अफवाह थी। एधी फाउंडेशन गरीब और वंचितों की मदद करने वाला बहुत बड़ा प्रतिष्ठान था जिसकी आड़ में हाजी छुपा रहकर हिंदुस्तान विरोधी काम करता था। पाकिस्तान सरकार भीतर भीतर उसे खूब मदद करती थी पर ऊपर से उससे सम्बन्ध होना स्वीकार नहीं कर सकती थी क्यों कि हाजी बाबा इंटरपोल का भी वांछित अपराधी था। 

थोड़ी देर ढूंढने के बाद शिवम को मनोनुकूल स्थान मिल गया। एधी फाउंडेशन के ठीक सामने एक होटल बिस्मिल्लाह की तीसरी मंजिल पर एक कमरा उसने पसन्द किया जिसकी खिड़की एधी की तरफ खुलती थी। शिवम ने थोड़ी देर खिड़की खोलकर उधर का नजारा किया पर उसे कोई अवांछित गतिविधि नजर नहीं आई। सब काम सुचारु रूप से चल रहा था।

अचानक एक एम्बुलेंस नजर आई जिसके दोनों तरफ एधी का बोर्ड लगा हुआ था लेकिन उसके शीशे पूरी तरह काले थे। उसके पहुँचते ही वातावरण थोड़ा असामान्य हो गया। सुरक्षाकर्मी विशेष चौकन्ने और बेचैन नजर आने लगे। दूसरे वाहन मुख्य गेट पर ही रुकते थे पर यह एम्बुलेंस दनदनाती हुई भीतर गायब हो गई। शिवम तुरंत होटल से निकला और एधी फाउंडेशन में जा पहुंचा। रिसेप्शन पर एक सुंदर लड़की बैठी थी जिसने व्यवसाय सुलभ मुस्कराहट के साथ शिवम का स्वागत किया। 

मैडम! अभी मेरे एक पेशेंट को लेकर एम्बुलेंस आई है वो कहाँ है? 

माफ़ कीजिय! आज तो अभी तक कोई पेशेंट नहीं आया है। उसने जवाब दिया 

ओह! हो सकता है ट्रैफिक के कारण नहीं पहुंचे हों, शिवम बोला,मैं बाहर इन्तजार करता हूँ। 

लड़की सहमति के भाव से मुस्करा दी। शिवम समझ चुका था कि कोई गड़बड़ घोटाला जरूर है। 

 शिवम थोड़ी देर दरवाजे के पास मंडराता रहा। किसी पेशेंट के रिश्तेदार जैसी बेचैनी उसके चेहरे से झलक रही थी। काफी लोग वहाँ आ जा रहे थे। इसकी ओर किसी का ध्यान नहीं था। शिवम थोड़ी देर बाद टॉयलेट की ओर चला गया। टॉयलेट की खिड़की से पीछे का नजारा दिख रहा था। वहाँ एक छोटा सा मैदान था जिसके बाद एक दो मंजिला इमारत थी जो पूरी तरह सूनसान लग रही थी। शिवम थोड़ी देर टॉयलेट में ही दुबका पीछे का जायजा लेता रहा अचानक कोई जोर जोर से टॉयलेट का दरवाजा पीटने लगा। शिवम हड़बड़ा सा गया फिर उसने पूरी सावधानी बरतते हुए दरवाजा खोल दिया। उसका कच्चे प्लास्टर वाला हाथ सामने को तना हुआ था और उँगली की एक हरकत से उसमें मौजूद प्लास्टिक गन गोलियां बरसाना शुरू कर सकती थी लेकिन जब उसने बाहर एक छोटे से बच्चे को पाया तो उसके चेहरे पर राहत के भाव आ गए। शायद बच्चा जल्दी में था तो वह जल्दी से भीतर घुस गया। शिवम सामान्य होने की कोशिश करता हुआ वहाँ से निकल आया। टहलता हुआ शिवम अपने होटल बिस्मिल्लाह की ओर बढ़ रहा था कि अचानक एक बुर्का धारी स्त्री आकर उससे टकरा गई। दोनों बुरी तरह लड़खड़ा गए। हाय अल्लाह कहकर स्त्री गिरने ही वाली थी कि शिवम ने झपट कर उसे संभाल लिया और इसी बात ने उसकी जान बचा दी। क्यों कि इस घटना के साथ ही एक बे आवाज गोली शिवम के कान को छूती हुई निकल गई। शिवम तुरन्त जमीन पर गिर पड़ा और कई करवटें लेकर बिजली की तेजी से कूड़े के ड्रम की ओट में हो गया। कहीं कोई हलचल नहीं दिखाई पड़ रही थी। पता नहीं किस तरफ से किसने गोली चलाई थी। साइलेंसर युक्त हथियार से फायर किया गया था तो कोई आवाज हुई नहीं, अतः किसी को कुछ पता नहीं चला था। शिवम थोड़ी देर उसी अवस्था में प्रतीक्षा करता रहा,क्यों कि गोली चलाने वाला दूसरा वार कर सकता था। सामने से एक बड़ा सा खटारा कूड़ा भरकर चला आ रहा था,जैसे ही वह शिवम के सामने से गुजरा वह तुरंत बेलकर उसके नीचे पहुँच गया और उसके नीचे के पाइपों को पकड़ कर चिपक गया। लगभग पांच सौ मीटर वह उसी तरह चिपका रहा फिर घटनास्थल से काफी दूर निकल आने पर उसने खटारे का साथ छोड़ दिया और सरपट अपने होटल की दिशा में भागा। होटल के कमरे में पहुँच कर उसकी मुसीबतें ख़त्म हो गईं थी ऐसी बात नहीं थी क्यों कि उसके कमरे में ऐसा लग रहा था मानो कोई भूचाल आया हो। वहाँ की जम कर तलाशी ली गई थी और एक एक सामान उधेड़ डाला गया था। दुश्मनों को बड़ी जल्दी खबर हो गई! वह बुदबुदाया और होटल के पिछवाड़े की खिड़की से पाइप पकड़ कर नीचे उतर गया अब वहाँ रुकना मौत को दावत देना था। 

 अब शिवम का एक ही सहारा बचा था। सलाहुद्दीन अंसारी! नारायण रहेजा ने निकलते समय शिवम को बताया था कि अगर पाकिस्तान में कोई मुसीबत आ जाये तो गोल मस्जिद के पास डिलाइट टेलर के मालिक सलाहुद्दीन अंसारी से मिल लेना वह अपना एजेंट है और हर तरह से तुम्हारी मदद करेगा।  शिवम किसी तरह बचता बचाता डिलाइट टेलर की दुकान पर पहुंचा। एक लगभग पचास साल का व्यक्ति काउंटर पर बैठा मोबाइल में गेम खेलने में व्यस्त था उसने प्रश्नवाचक दृष्टि से शिवम की ओर देखा। 

अस्सलाम आलेकुम, शिवम ने कहा 

वालेकुम अस्सलाम, वह बोला, कहिये? 

मैं गोपाल बाबू हूँ, इंडिया से आया हूँ आपका नाम? 

मेरा नाम सलाहुद्दीन है, कहिये मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूँ?

शिवम ने एक बार इधर उधर देखा और धीमे से बोला, कुतुबमीनार की सातवीं मंजिल को मरम्मत की जरूरत है।

सलाहुद्दीन की आँखें चौड़ी हो गईं,वह बोला, ताजमहल के भी हाल ज्यादा अच्छे नहीं हैं। 

यह कोड था। सलाहुद्दीन तुरंत शिवम को भीतर ले आया और बोला, कहिये शिवम साहब! क्या प्रॉब्लम हो गई है? मुझे ऊपर से फोन आ चुका है। 

-सुनो यार! मुझे पहचाना जा चुका है इसीलिए अब मैं बिना वेश बदले नहीं घूम सकता। तुम मेरे लिए वेश बदलने का इंतजाम कर दो और एक हथियार का भी बंदोबस्त करो 

-आप यहीं आराम फरमाएं मैं थोड़ी देर में हाजिर होता हूँ कहकर वह चला गया। लगभग एक घंटे बाद वह लौटा तब तक शिवम अपने हाथ के नकली प्लास्टर से छुटकारा पा चुका था और प्लास्टिक की छोटी सी गन उसने अपने मोज़े में छुपा ली थी जो पलक झपकते ही उसके हाथों में आ सकती थी। सलाहुद्दीन ने एक छोटी सी थैली शिवम के आगे उलट दी जिसमें मेकअप का सामान और हुलिया बदलने की चीजें थी। शिवम ने देखा कि उसमें लुंगी और कुरता के साथ एक ऐसा विग था जो लगाने पर इंसान बीच से गंजा लगने लगता। शिवम ने वही कपड़े पहन लिए सिर पर विग लगा लिया और एक नकली मस्सा बाईं आँख के नीचे चिपका लिया। इसके पहले वह एक ऐसी क्रीम चेहरे और हाथों पर मल चुका था जिससे उसका गोरा रंग धूप में तपे तांबे की तरह हो गया था। उसने शीशे में खुद को देखा और संतुष्टिपूर्ण ढंग से सिर हिलाकर टॉयलेट से बाहर निकला। अंसारी जो यह सब सामान लाया था वह खुद उसे प्रशंसात्मक ढंग से देखता रह गया। शिवम अब ठेठ पाकिस्तानी मुसलमान लग रहा था। उसने प्रश्नवाचक दृष्टि से अंसारी को देखा तो उसने चुपचाप एक स्मिथ एन्ड वेसन की रिवाल्वर आगे बढ़ा दी जो जोरदार धमाके के साथ फायर करती थी। शिवम ने उसे खोलकर चेंबर का मुआयना किया तो वह लोडेड थी। वह शुक्रिया कहकर बाहर निकल आया। अब उसे ख़ूनी खेल खेलना था।  

शिवम शाम होने तक बाजार में घूमता फिरता रहा। उसके सीक्रेट मिशन की दुश्मन को खबर कैसे हुई यह सोचता रहा। आखिर दुश्मन ने बिस्मिल्लाह होटल के कमरे की तलाशी कैसे ली? जरूर उसे कहीं से लीड मिली होगी। उसके मिशन की खबर तो केवल उसके अफसरों को थी! शिवम ने अपने हिसाब से खेलने का फैसला किया। उसने प्राडो नामक एक सस्ते होटल में जाकर अफजल खान के नाम से अपना परिचय देकर एक कमरा लिया,  और बताया कि वह इस्लामाबाद से व्यापार के लिए कराची आया है और दो दिन ठहरेगा।  फिर उसने हिंदुस्तान फोन करके ऑफिस में अपने इस कदम की जानकारी दे दी। अपने नए बहुरूप के बारे में भी बताया।  फिर उसने पलंग पर तकिया रखकर ऊपर से कम्बल ओढ़ा दिया। अब देखने पर ऐसा लग रहा था मानो कोई बिस्तर पर सोया है। खुद शिवम एक कुर्सी लेकर दरवाजे की बगल में बैठकर प्रतीक्षा करने लगा। पूरी रात बीत गई लेकिन कुछ नहीं हुआ। सुबह की अजान होने लगी। अचानक शिवम को दरवाजे पर कोई खटका महसूस हुआ तुरंत वह चौकन्ना हो गया। उसकी गिद्ध दृष्टि दरवाजे पर जम गई। उसके कान हलकी से हलकी आहट सुनने को बेताब थे। किसी ने धीरे से ताले में चाबी डालकर घुमाई और धीरे धीरे दरवाजा खुलने लगा। जैसे ही एक आदमी के घुसने लायक जगह हो गई एक दुबला पतला लंबा सा इंसान भीतर दाखिल हुआ और इधर उधर का जायजा लेने लगा। फिर उसने पॉकेट से साइलेंसर लगी रिवाल्वर निकाली और कई गोलियां बिस्तर पर दाग दीं। बेआवाज गोलियां जाकर तकिए से टकराईं और रुई उधड़कर इधर उधर उड़ने लगी। इसके पहले कि उसका असमंजस और बढ़ता शिवम आड़ से निकला और उसने चुपचाप उसकी कनपटी पर अपनी गन रख दी। उसके कसबल ढीले पड़ गए। शिवम ने अपनी गन की नाल से उसकी कनपटी पर प्रहार किया तो उसकी आँखें उलट गईं, उसके घुटने मुड़े और वह धराशाई हो गया। शिवम ने एक पतली सी डोरी से उसके हाथ पाँव बाँध दिए और उसे पलंग पर लिटा कर उसके मुंह पर पानी छिड़कने लगा। 

 थोड़ी देर में उसने कराहकर आँख खोल दी फिर जैसे ही चिल्लाने के लिए मुंह खोला, शिवम ने उसके मुंह में रिवाल्वर की नाल घुसेड़ दी और क्रूर स्वर में बोला, चुप रहो वर्ना गोली अंदर, दम जालंधर! 

उसकी आँखें आतंक से फट पड़ी, वह जल्दी जल्दी सहमति में सिर हिलाने लगा।  

उसने बताया कि वह आई एस आई का एजेंट है जिसे इस कमरे में ठहरे गंजे व्यक्ति का कत्ल करने का काम दिया गया था।  

क्या हाजी बाबा एधी के दफ्तर में ही रहता है?  शिवम ने पूछा 

- नहीं! आता जाता रहता है, 

परमानेंट वह कहाँ रहता है? शिवम उसकी कनपटी पर फिर नाल चौंकता हुआ बोला 

खुदा की कसम मैं नहीं जानता। वह रोने लगा 

- क्या एधी फाउंडेशन आतंक के खेल में शामिल है?

-नहीं, नहीं!  वो तो सवाब के काम करते हैं पर सरकारी आदेश से उनका दफ्तर हाजी बाबा काम में लेता है। 

-अब हाजी वहाँ कब मिलेगा?

-हर जुम्मे को वहाँ पोशीदा मीटिंग होती है, आज जुम्मा है आज रात जरूर आएगा। 

शिवम ने इस बीच उसकी गन चेक की तो वह खाली हो चुकी थी उसने उसका साइलेंसर निकाल कर अपनी गन पर चढ़ा लिया और बिना कुछ कहे उसकी छाती में गोली मार दी। उसका शरीर एक बार उछला और शांत पड़ गया। शिवम उसकी गन वहीं फेंककर चुपचाप बाहर निकल गया।  

 शिवम समझ गया था कि उसके हेड क्वार्टर से सूचनाएं लीक हो रही हैं तो उसने बाजार जाकर नया बहुरूप बना लिया था। अब उसके बदन पर टाइट जींस और टी शर्ट थे।  गले में एक क्रॉस लटक रहा था। उसने एक हिप्पी जैसा वेश बना लिया था जिन्हें दीन दुनिया से कोई मतलब नहीं होता। हेडक्वार्टर से फोन आये तो शिवम ने रिसीव ही नहीं किये।  वह एधी के दफ्तर के आसपास मंडराता रहा। शाम हो गई थी। अचानक उसे फिर वहाँ का माहौल तनावपूर्ण महसूस हुआ और एक काले शीशे वाली एम्बुलेंस द्वार पर आई जो फर्राटे से भीतर चली गई। शिवम जल्दी से इमारत का घेरा काटकर पीछे पहुंचा। वहाँ ऊँची चहार दीवारी थी जिसपर कांटेदार तार लगे हुए थे। एक इमली का ऊंचा पेड़ बाहर ही था जिसकी कुछ डालियाँ कंपाउंड के भीतर तक गई हुई थी। शिवम लपक कर पेड़ पर चढ़ गया और परिश्रम पूर्वक डाली पर सरकता हुआ कंपाउंड में कूद पड़ा लेकिन नीचे कूदते ही उसकी एक टांग एक भयानक बुलडाग के दांतों में फंस गई जिसने निःशब्द उसे दबोच लिया था। शिवम के चेहरे पर पीड़ा के भाव उभरे लेकिन दूसरे ही पल उसकी साइलेंसर युक्त रिवाल्वर से पिट की आवाज हुई और बुलडाग का खेल ख़त्म हो गया। शिवम झपटकर खड़ा हुआ और लंगड़ाता हुआ इमारत की दिशा में भागा। उसे किसी भी पल गोली लगने की आशंका हो रही थी पर उसका भय निर्मूल सिद्ध हुआ वह निर्विघ्न इमारत तक पहुंच गया।  इमारत का द्वार सूना लग रहा था वह निःशब्द बिल्ली की तरह चलता हुआ गलियारा पार कर गया। सामने सीढ़ियां थीं। शिवम पूरी सावधानी से ऊपर आ गया। ऊपर एक कमरे से बातचीत की हलकी आवाजें आ रही थी। शिवम चुपचाप दरवाजे के पास पहुंचा और कान लगाकर भीतर का जायजा लेने लगा। अचानक उसने अपने कान पर ठण्डे लोहे का स्पर्श महसूस किया। एक दैत्यनुमा आदमी उसके सिर पर खड़ा जलती आँखों से घूर रहा था। उसने एक हाथ से कनपटी पर बन्दूक सटाये हुए ही दूसरे हाथ से उसकी गन झपट ली फिर गुड्डे की तरह उसे उठाकर भीतर ले चला। भीतर चार लोग एक गोल मेज के इर्द गिर्द बैठे बातचीत में मशगूल थे। वे चारों चौंक पड़े। उनमें एक हाजी बाबा था। 

नन्हे मियाँ! कौन है ये नामाकूल?  किसी ने पूछा 

कोई जासूस मालूम पड़ता है, मैंने इसकी पिस्तौल भी छीन ली है,नन्हे बोला। 

उस दैत्य का नाम नन्हे है,यह जानकर उस विषम परिस्थिति में भी शिवम के चेहरे पर मुस्कराहट आ गई जो तब पीड़ा में बदल गई जब एक पतले से व्यक्ति ने जोरदार लात उसके पेट में मारते हुए कहा, कौन है तू? 

मैं कौन हूँ ये छोड़ो! पर तुम मुहम्मद लतीफ़ हो ना? मालेगांव के कुत्ते?अपने वतन से गद्दारी करके यहाँ आ गए दुश्मनों का पिछवाड़ा चाटने! शिवम गरज कर बोला।

ओह! हिंदुस्तानी कुत्ता है! हाजी बाबा मानो खुद से बोला।  फिर नन्हे से मुखातिब हुआ, इसे तहखाने में ले जाकर बाँध दो हम बाद में खुद इसकी चमड़ी उधेड़कर गोश्त खींचेंगे। 

नन्हे ने एक प्रचंड घूंसा शिवम की छाती पर मारा जो उसे ऐसा लगा मानो छाती पर बुलडोजर चढ़ गया हो, उसकी चेतना लुप्त होने लगी नन्हे ने उसे एक खिलौने की तरह कंधे पर लाद लिया और तहखाने की ओर ले चला। 

 जब शिवम को होश आया तब वह बुरी तरह बंधा हुआ जमीं पर पड़ा था।  नन्हे के घूंसे से उसकी छाती बुरी तरह दर्द कर रही थी।  नन्हे दरवाजे के बाहर एक स्टूल पर बैठा था।  उसके पैरों का थोड़ा हिस्सा शिवम को दिखाई पड़ रहा था।  उसे अपने शिकार के न छूट पाने की पूरी गारंटी थी।  वह मस्ती में कोई पंजाबी गीत गुनगुना रहा था। शिवम के हाथ पीछे बंधे हुए थे उसने जोर लगाया तो पतली रस्सी उसकी खाल में धंसने लगी और ऐसा लगा मानो कलाई की हड्डी टूट जायेगी।  हारकर उसने जोर लगाना छोड़ दिया। शिवम ने अपने पैरों को एक दूसरे से रगड़ा तो उसे आभास हुआ कि उसकी इटालियन पिस्तौल उसके मोज़े में छुपी हुई थी जिसपर नन्हे का ध्यान नहीं गया था। उसने तो साइलेंसरयुक्त रिवाल्वर अपने अधिकार में करके अपने कर्तव्य की इतिश्री मान ली थी।  वैसे भी उसे अपने बाजुओं पर इतना भरोसा था कि वो निहत्था ही तोप से मुकाबला कर लेगा।   शिवम कोशिश करके अपने पैरों को इस अवस्था में ले आया कि खटके पर हल्का सा दबाव देते ही पिस्तौल फायर कर देती। अब उसने खूब उछलना कूदना शुरू कर दिया और सिर पटकने लगा।  नन्हे का ध्यान इसपर गया तो वह भागकर भीतर आया। उसके देखते शिवम की आँखें उलटने लगीं और मुंह से झाग निकलने लगा। नन्हे उसकी यह अवस्था देखकर घबरा गया।  उसे शक हुआ कि कहीं कोई सांप तो इसे नहीं काट गया। उसने शिवम को बगल से पकड़ा और उलट दिया जिससे उसके नीचे कोई सर्प हो तो दिख जाए लेकिन इस प्रक्रिया में उसका बड़ा सा दैत्याकार चेहरा बिलकुल पिस्तौल की नली की जद में आ गया शिवम ने बिना वक्त गंवायें अपनी प्रिय इतालवी पिस्तौल पर उस जगह दबाव दिया जिससे फायर होता था और हमेशा की तरह इस बार भी उसने शिवम को निराश नहीं किया। पलक झपकते ही नन्हे की दोनों आँखों के बीच तीसरी आँख बन गई जिसमें से रक्त परनाले की तरह फूट पड़ा। वह निःशब्द पीछे को उलट गया। शिवम ने जल्दी से कोशिश करके उसकी जेब से एक छोटा सा चाक़ू निकाल लिया और पांच मिनट की कोशिश के बाद खुद को मुक्त करने में कामयाब हो गया। थोड़ी देर तक वह अपने हाथों और पैरों को मसलता रहा क्यों कि कस कर बांधे जाने के कारण उनका रक्तप्रवाह बाधित हो गया था। थोड़ी जान लौटते ही वह स्प्रिंग लगे बबुए की तरह उछलकर खड़ा हो गया और बाहर को भागा।  उसने नन्हे के पास से साइलेंसर युक्त रिवाल्वर हाथों में ले ली थी।  इस बार वह असावधान नहीं होना चाहता था।  

 नन्हे उसे तहखाने में ले आया था जहाँ से दो सीढ़ियां फलांगता वह ऊपर पहुंचा और सतर्कता पूर्वक इधर उधर का जायजा लेने लगा। बारहदरी पूरी तरह सूनसान थी। बिल्ली जैसी चाल चलता शिवम फिर उसी दरवाजे पर पहुंचा जहां से नन्हे उसे पकड़ ले गया था।  भीतर ऊँचे शब्दों में बातचीत की आवाज आ रही थी। शिवम ने एक जोरदार लात दरवाजे पर जमाई तो दरवाजा टूट कर कब्जों पर झूल गया। शिवम कूदकर भीतर जा पहुंचा। उसे देखकर चारों बुरी तरह चौंक पड़े।  

नन्हे? हाजी बाबा के मुंह से निकला 

शिवम ने मुस्कुराते हुए उँगली ऊपर उठा दी। बाबा के चेहरे पर जमाने भर की हैरत उभर आई।  

तुम जैसा चूहा नन्हे को काबू कर सके? नामुमकिन! वह बोला। 

हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या? शिवम बोला। 

इतनी देर में मुहम्मद लतीफ़ का हाथ अपनी जेब में रेंग चुका था लेकिन वह उसके जीवन की आखिरी गलती साबित हुई। शिवम की चौकन्नी नजरें उन चारों पर ही जमी हुई थी। उसकी रिवाल्वर ने एक बेआवाज बुलेट उगल दी जो जाकर लतीफ़ की कनपटी से टकराई और उसकी रूह फौरन जिस्म से किनारा कर गई। 

 अब बाकी बचे तीनों के शरीर के सारे अवयव पसीना बहाने की प्रतियोगिता में भाग ले रहे थे। हाजी बाबा बोला, सौदा करेगा? बोल कितने पैसे चाहिए? अभी मिलेंगे! 

शिवम ने मुस्कुराकर रिवाल्वर का घोड़ा दबा दिया। हाजी बाबा के दिमाग के परखच्चे उड़ गए। बाकी बचे दोनों घिघियाते हुए शिवम के क़दमों में लोट गए। 

तुम दोनों अपना नाम और ओहदा बताओ,शिवम गुर्राता हुआ बोला मैं कलीम कौसर खान, सेना में लेफ्टिनेंट जनरल हूँ, एक घिघियाता हुआ बोला, मुझे मत मारो प्लीज! और तुम? शिवम ने दूसरे की ओर इशारा किया 

मैं मुफ़्ती सलीम बेग हूँ शाही मस्जिद का इमाम! हमें छोड़ दो।

तुम दोनों भी मेरे वतन को बर्बाद करने के मनसूबे बांधे बैठे हो न कुत्तों!  शिवम दांत पीसता बोला, लो एक वतनपरस्त की सलामी! और उसकी गन से निकले दो शोलों ने उनके नापाक जिस्मों को हमेशा के लिए रूह से अलग कर दिया।  पांच लाशों को वहीं छोड़कर शिवम चुपचाप वहाँ से निकल गया और दो घंटे बाद वह अपने वैध वीजा पर मुम्बई जाने वाली फ्लाइट पर सवार था।  

  अगले दिन अपने ऑफिस पहुंचकर शिवम ने नारायण रहेजा को रिपोर्ट दी।  रहेजा ने खुद खड़े होकर उसकी पीठ थपथपाई और बोला, वेल डन माय बॉय! वेल डन! तुमने मेरा सिर फख्र से ऊंचा कर दिया। कल खुद गृहमंत्री तुमसे मिलेंगे।  

सर एक बात पूछनी थी, शिवम धीरे से बोला 

हाँ हाँ पूछो! नारायण बोला 

मुझपर कराची के बाजार में साइलेंसर युक्त रिवाल्वर से गोली चलाई गई जबकि मेरे सीक्रेट मिशन के बारे में चंद लोग ही जानते थे और जब मैंने भेस और होटल बदल कर आपको सूचित किया तो मुझे मारने के लिए एक कातिल वहाँ भी आ धमका! जरा आप मुझे समझाइए कि ऐसा क्यों हुआ सर?

  नारायण रहेजा रुमाल निकालकर अपना पसीना पोंछता हुआ बोला, तुम कहना क्या चाहते हो शिवम?

 सर! मेरे मिशन की जानकारी किस किस को थी?

मुझे, तुम्हें और गृहमंत्री बाबूराम सैनीजी को, नारायण बोला

फिर तो हिसाब बिलकुल साफ़ है सर! तीनों में से ही किसी ने सूचनाएं लीक की होंगी न?

शिवम मैं भगवान की सौगंध खाकर कहता हूँ कि मैंने ऐसा कुछ नहीं किया है और गृहमंत्री जी के बारे में तो मैं ऐसा कुछ सोच भी नहीं सकता। 

अचानक शिवम ने होंठों पर उँगली रखकर नारायण को चुप रहने का संकेत किया और बोला, सर! आप ही गद्दार हैं और मैं आपको नहीं छोडूंगा, इतना कहते कहते शिवम दबे पांव आगे बढ़ा और उसने झटके से केबिन के पार्टीशन का दरवाजा खोल दिया। रमाकांत जो केबिन के दरवाजे से सटा हुआ था वह लड़खड़ा गया और मुंह के बल कमरे में आ गिरा। अगले ही पल उसकी गर्दन शिवम की फौलादी पकड़ में थी। थोड़ी सी ही सख्ती से उसने कबूल कर लिया कि वही आस्तीन का सांप है। उसने रहेजा के फोन भी टेप कर रखे थे। उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। शिवम को खूब वाहवाही मिली और उसे नेशनल हीरो का दर्जा मिल गया। बाद में उसने नारायण रहेजा से अपने बर्ताव की माफ़ी मांगी तो रहेजा ने उसे गले से लगा लिया। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


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