सीख
सीख
गोली से भी तेज चलती है कलम
2 जनवरी 2023 की सीख भी बहुत शानदार रही।
जब शाम को कार्यालय में कार्य कर रहे थे।
तभी जावेद ने कहा सर मीटिंग होना अत्यंत आवश्यक है।
हमने कहा नहीं आज से मुफ्त का ज्ञान नहीं बांटना है।
मुफ्त का ज्ञान किसी को नहीं देना चाहिए।
मुफ्त का ज्ञान यदि दे तो वह समझ में भी नहीं आएगा।
मुफ्त और बिना मांगे ज्ञान नहीं देना चाहिए।
वरना दुनिया पागल समझती है।
जावेद ने कहा ऐसा क्यों कह रहे हो सर।
हमने कहा टीम के कई सदस्य नहीं चाहते मीटिंग हो।
वह बोला आपने कहा था मीटिंग प्रति दिन होगी।
हमने कहा आपकी बात सही है।
परंतु हम नहीं चाहते हमारी भविष्य बनाने वाली कला में कोई मन मसोसकर उपस्थित रहे।
हम नहीं चाहते कोई कार्यालय का कार्य समाप्त करने के पश्चात।
हमारी व्यर्थ की मीटिंग में उपस्थित रहकर मीटिंग समाप्त होने के पश्चात हमें अपशब्द कहे।
जावेद हम आपको बता दें अपनी टीम के लिए ही नहीं।
अपितु दुनिया के लिए भी हम अपनी तरफ से कितना भी भला कर ले।
उसके पश्चात भी कुछ टीम के सदस्य और कुछ लोग जो पीठ शाबाशी के लिए बनी है।
उसमें छुरा मारते देर नहीं लगाएंगे।
कहते है ना नेकी कर कुय में डाल।
हम यह भी नहीं चाहते जो टीम सब कुछ जानती है।
जिस टीम को सब कुछ आता है।
वह हमारी मीटिंग सिर्फ इसलिए अटेंड करें या उपस्थित रहे क्योंकि हम उनके आला अधिकारी हैं।
यह बात भी हमें स्वयं से समझनी होगी।
हमें किसी भी प्रकार से हक नहीं है।
उनका कार्य समाप्त होने के पश्चात अपनी फालतू बातों के लिए मीटिंग करें।
हमे कोई अधिकार नहीं है। सफल टीम का बहुमूल्य समय नष्ट किया जाए।
सिर्फ मीटिंग का नाम लेकर।
हम भी यह मानते है हमारी 10 से 15 मिनट की मीटिंग से किसी के जीवन में बदलाव नहीं आ सकता।
परंतु मन दिमाग इतना सकारात्मकता से भरा हुआ है।
वह हमें दूसरों की भलाई के लिए कार्य करने पर बाध्य कर देता है।
जावेद ने कहा सर मीटिंग का होना जरूरी है।
यदि कोई उसे अटेंड नहीं करता तो कोई बात नहीं।
हमने कहा आप सही कह रहे हो।
*हम छोड़ दे मीटिंग दूसरों के लिए यह मुनासिब नहीं एक सफल लीडर के लिए।*
हमने कहा जावेद उन व्यक्तियों को नजरअंदाज करना होगा।
जो खेलें खिलाए हैं जो गोदाम का सारा कार्य अच्छी तरह से जानते हैं।
जो कार्य करने में निपुण है जो कार्य करने की कला में कुशल कर्मचारी हैं।
परंतु हमने जैसे हम अक्सर कहते रहते है।
*हमें सीखने की ललक बहुत ज्यादा है।*
इसीलिए हम उनसे सीखने के लिए तैयार हैं।
जो यह सोचते है मीटिंग करना समय की बर्बादी है।
यदि वह प्रशिक्षण के दौरान हमें प्रशिक्षित करें। हमें अत्यंत प्रसन्नता होगी।
जावेद कुछ प्रश्न पूछने ही वाला था।
तभी हमने उसकी बात को बीच में ही काटते हुए कहा।
जावेद आपने ही प्रशिक्षण देने के लिए हमें तैयार किया था। हम आप का धन्यवाद करते हैं।
परंतु कल ही हमें प्रशिक्षण ना लेते हुए भी यह सीखने को मिला।
जावेद ने बड़ी उत्सुकता से पूछा जावेद ने प्रोत्साहित होते हुए पूछा जावेद ने मुस्कुराते हुए पूछा जावेद ने हंसते हुए पूछा सर बताएं आपने कल क्या सीखा।
हमने कहा जावेद जैसा की पूरी टीम जानती है।
कल शाम प्रशिक्षण होना था परंतु प्रशिक्षण नहीं हो पाया।
क्या आपमे से कोई बता सकता है।
प्रशिक्षण जब निश्चित था तब प्रशिक्षण क्यू शुरू नहीं हो पाया।
सब हंसने लगे सब आश्चर्यचकित होकर एक दूसरे को देखने लगे।
सब यह सोचने लगे जवाब देने के लिए पहल कौन करेगा।
बिल्ली के गले में घंटी कौन बंधेगा।
हमने सबको आंखों ही आंखों में शरीर की भाग भंगिमा और इशारों ही इशारों में एक दूसरे से पूछते हुए देखा और सुना जैसे वह एक दूसरे को कह रहे हो तुम बताओ।
हमने कहा बताओ कल प्रशिक्षण क्यों नहीं हो पाया।
कोई भी कुछ कहने से कतरा रहा था। या उन्हें वास्तव में मालूम नहीं था।
आखिर क्यूं कल प्रशिक्षण नहीं हो पाया।
हमने कहा इसमें इतना आश्चर्यचकित होने की आवश्यकता नहीं है।
हमने कहा इसमें एक दूसरे को निहारने की कोई आवश्यकता नहीं है।
हमने कहा इसमें इतना विस्मित होने की भी आवश्यकता नहीं है।
यदि कल मीटिंग नहीं हो पाई तो इसका साधारण सा तात्पर्य है। कल मीटिंग की किसी को आवश्यकता नहीं थी।
या यह भी हो सकता है भगवान राधे कृष्ण स्वयं से नहीं चाहते कि आपके जीवन में उन्नति हो प्रगति हो। आप सब तरक्की करें।
हमने कहा यह छोटी मोटी बातें और छोटे एवं बड़े शहर में गांव खेत खलियान में होती रहती हैं
परंतु जावेद आप यह समझ ले हमारे द्वारा अपनाई गई छोटी-छोटी आदतें हम में बड़ा बदलाव लाती है।
जैसे सुई बहुत छोटी होती है परंतु बड़े बदलाव लाने के लिए कार्य करती है।
जावेद आप यह भी समझ ले जिन छोटी-छोटी बातों का जिक्र हम प्रतिदिन करते रहते हैं।
वह हमारे जीवन को उन्नति की तरक्की की प्रगति की दिशा में ले जाने वाली होती है।
इसे आप एक उदाहरण के माध्यम से भी समझ सकते हैं।
यदि हमारे टीम का हर सदस्य 8.55 8:50 बजे आ जाए।
तो हमारे कार्य को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
जावेद ने कहा आप एकदम सही कह रहे हो सर।
हमने कहा टीम का हर सदस्य यह समझ ले।
हमने कल शाम को जो सीखा है।
वह कुछ और नहीं बल्कि सबसे महत्वपूर्ण सीख हमें आज आप जैसे ज्ञानियों से ही प्राप्त हुई है।
कल शाम को जो हमने सीखा है वह कुछ और नहीं बल्कि सबसे महत्वपूर्ण सीख आप जैसे टीम के सदस्यों से प्राप्त हुई है।
जो गोदाम का सारा कार्य जानते हैं।
वह है यदि पेट भरा हो तो कोई भी कार्य नहीं करेगा।
यदि पेट भरा हो तो कोई भी किसी की बात को नहीं सुनेगा।
यदि पेट भरा है तो दूसरा बोना ही नजर आएगा।
यदि पेट भरा है तो दूसरे के बारे में देखना तो दूर सोचना भी नहीं पड़ता।
जैसा हमारे ही टीम के सदस्य काम की समाप्ति होने से पहले जोर देकर कहते रहे।
जिसे जाना है वह चला जाए परंतु आप मीटिंग लिया करो।
हमने कहा सही बात है मीटिंग होगी काम समाप्त होने के पश्चात।
जैसे ही काम समाप्त हुआ वैसे ही सब समोसे खाने लगे उनमें से हम भी एक थे।
हमें भी हमारे टीम के सदस्यों ने समोसा खिलाया।
सबने समोसे खाए हमने भी समोसे खाए समोसे खाने के पश्चात मीटिंग का समय था।
तभी एक-एक करके सब ने अपना बैग उठाया और चलते बने अपने घर की तरफ।
किसी के मुंह से झूठे भी नहीं निकला आज मीटिंग नहीं लोगे सर।
बावजूद इसके हमें खुशी है हमारे साथ काम करने वाले समय से अपने कार्यालय का कार्य समाप्त करके घर लौट जाते हैं।
हमें अत्यंत प्रसन्नता है हमारी टीम के सदस्य अपनी जिम्मेदारी समझते हुए गोदाम का कार्य सफलतापूर्वक कर रहे हैं।
जिसे देखकर हम चुपचाप मन ही मन प्रसन्नता से भर जाते हैं।
हम खुश हैं क्योंकि हमारे टीम के सदस्यों के चेहरे पर मुस्कान हैं।
निर्माण रिटेल होल्डिंग्स डी एल ओ नजफगढ़ शाखा मान सिंह नेगी के टीम के सदस्य कर रहे हैं मौज।
कोई भी हमारी बातों पर ध्यान ना दें।
वह पूछ ले हमारे साथ कार्य करने वाले टीम के सदस्यों से।
वह निर्माण रिटेल होल्डिंग्स मान सिंह नेगी डी एल ओ नजफगढ़ शाखा के साथ कार्य करते हुए स्वस्थ और मस्त है या नही।
हम टीम के सदस्य को ही नहीं अपितु हर क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए यही कहना चाहेंगे।
जो जूते हमें चलने में मदद करते हैं। कील पत्थर कंकड़ कांच आदि से बचाते हैं।
उन जूतों को क्यों चमकाया जाता है।
जूतों को जिन्हें पैरों में ही पहनना है। उन्हें क्यों इतना सजाया जाता है।
क्या कोई हमें बता सकता है हम जानते हैं। यह बात इतनी सरल भी नहीं है। जितनी हम समझ लेते हैं।
या जान पाते हैं दोस्तों जीवन में अपने आप में अपने व्यवहार में अपने क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने का यह भी एक मूल मंत्र है।
जैसे हम और आप अपने जूते चमकाते हैं।
वैसे ही हमें अपने टीम के सदस्यों को चमकाना पड़ता है।
जिससे वह अपने जीवन में अपने कार्य क्षेत्र में सफलता प्राप्त करें।
यह बहुत ही अत्यंत आवश्यक होता है।
परंतु अधिकतर लोग इस बात को समझने में असफल हो जाते हैं।
जिसके कारण जीवन में अपने जीवन में सफलता की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाते।
हमें यह कहानी यहीं समाप्त करनी होगी।
कहीं ऐसा ना हो पढ़ने वाले पाठक लंबा लेख समझते हुए बुरा ना मान जाएं।
चलते चलते आदत से मजबूर एक बात और कह दे।
जो व्यक्ति ता उम्र सीखता है याद रहे दोस्तों जो व्यक्ति ता उम्र सीखता है।
वह जीवन में कभी भी बूढ़ा नहीं होता।
इसको समझने के लिए एक छोटा सा उदाहरण ही पर्याप्त है हमारा जन्म।
