Kanchan Jharkhande

Romance


Kanchan Jharkhande

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स्कूल का प्यार

स्कूल का प्यार

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स्कूल का वो पहला प्यार 

आज चौक गलियारे में मिला

जैसे पतझड़ में बिछड़ा फूल 

तो फिर बहारों में मिला


कभी करता था शरारत 

कागज ऐ चिट्ठी तले

वो बचपन का प्यार 

आज हिजाबों में मिला


देखा उसे मैंने भी गौर से

डिग्री कर चुका है अब

जब मिला तो उसी 

"अंदाज़ ऐ पाठशाला" में मिला

थोड़ा बड़ा हो गया है


समझदार भी,

आँखों में हया भी

मुझें तककलुफ न हो जाये

इसलिये तशखीस ऐ शरारत में मिला

कभी टपकती थी उसकी


नाक से रोग़न ऐ तरल

ज़नाब अब का मिला तो

बड़ा नवाबों में मिला

कभी देता था बोगनविलिया

गुलशन ऐ फूल कहकर


एक अरसा की हिज्र के बाद

वो सूखा गुलाब मुझे

किताबों में मिला।


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