भाव मत खाओ
भाव मत खाओ
अपनी खबर अब रहती कहां है
तुम्हें देख भी लूँ तो खो जाता हूं
तुम सामने मिल जाओ तो क्या बात
तुम ना भी हो तो तुम्हारा हो जाता हूं।
तुम्हें तो यकीन ही नहीं होता
अरे हवाओं में बात थोड़ी कर रहा हूं
अब कैसे समझाऊं तुम्हें कि
मैं कोई मजाक थोड़ी कर रहा हूं।
तुम्हें सच बताता हूँ तो हमेशा
यही कहती हो मैं नहीं मानती
अरे तुम मेरे लिए क्या हो आखिर
ये तो तुम खुद भी नहीं जानती।
तुम वह आमदनी हो जिसके सहारे
पूरी जिंदगी बिताई जा सकती है
तुम रात के अंधेरे के वह चांदनी हो
जिसे देख पूरी रात बिताई जा सकतीं हैं।
यूं ही बैठी रहो पास मेरे सदा तुम
मुझसे कभी भी दूर मत जाओ
तुम्हें भी मुझ सा कोई नहीं मिलेगा
चलो अब इतना भी भाव मत खाओ।

