तुम रखना चाहत राधा सी
तुम रखना चाहत राधा सी
तुम रखना चाहत राधा सी
मैं कान्हा बनकर आऊँगा !
अंधकार में जब तुम होंगी
मैं जुगनू बन छा जाऊँगा
धूप तपा देगी जब राह को
मैं शीतल जल बन बह जाऊँगा
विपरीत लगे जब तुम्हे परिस्थिति
मैं तुमको राह दिखाऊँगा
तुम रखना चाहत राधा सी
मैं कान्हा बनकर आऊँगा !

