Akash Yadav
Tragedy
खिलाना चाहा, जब भी गुलाब इश्क़ का
ज़माना इस कदर उभरकर आता है,
फूल ले जाता है, अनजान कोई
महज़ कांटा ही हिस्से आता है।
रूबरू हुआ अब, तो पता चला
बदल गया, कमबख्त ये ज़माना
हमने तो सुना था, फ़ूल बोओ तो
यकीनन, फूल ही उगकर आता है।
मैं और मेरा म...
इम्तिहान
शरबत इश्क़ वाल...
अहमियत
आज का समाज
दुश्मन ज़माना
उसका साथ☺️
शोर और खामोशी
गुलाब इश्क़ का
ज़माना और इश्क़
चीख उठी है स्वयं वेदना, देख क्रूरता के मंजर । चीख उठी है स्वयं वेदना, देख क्रूरता के मंजर ।
जो मिले थे गुल कहीं खिले, वो स्वप्न सब धूल में मिले। जो मिले थे गुल कहीं खिले, वो स्वप्न सब धूल में मिले।
क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ? क्यों कहें निज हस्त खुद को, मौत मुंह में टाँगते हैं ?
मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थकान भी वापस लेती हूँ... मैं तेरी-मेरी बातों के, अल्फ़ाज़ ही वापस लेती हूँ। थक आज गयी हूँ मैं इतना, कि थ...
व्यभिचारी भी क्या आखेटक नहीं? मासूम बच्ची को बना शिकार हवस का। व्यभिचारी भी क्या आखेटक नहीं? मासूम बच्ची को बना शिकार हवस का।
पड़ी रहती हूँ घरों में एक सजावट की वस्तु बनकर। पड़ी रहती हूँ घरों में एक सजावट की वस्तु बनकर।
हृदय का तुमको दान दिया था, जीवन तुममें जान लिया था हृदय का तुमको दान दिया था, जीवन तुममें जान लिया था
तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर आ जाता हू तड़पने वाले को उसके हाल पर छोड़कर निकल जाता हूँ मैं कुछ रूह का हिस्सा दफना कर ...
कितने तो आँसू बहे होंगे इन आँखों से, घर ये खारे पानी का। कितने तो आँसू बहे होंगे इन आँखों से, घर ये खारे पानी का।
हे ब्रह्मदेव ! तुम नहीं जानते कितना कठिन होता है। हे ब्रह्मदेव ! तुम नहीं जानते कितना कठिन होता है।
हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं। हां दर्द दिल में उठता है..कैसे कह देते हो तुम फिर भी मैं पराई हूं।
मुझे माफ़ करना पुष्प, मैं अपने दिल को समझा न पाया, तुम्हें तो पता ही होगा कि दिल के पास। मुझे माफ़ करना पुष्प, मैं अपने दिल को समझा न पाया, तुम्हें तो पता ही होगा कि द...
उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..। उसकी देह पर दो फटे पुराने कपड़े थे हाथ में एक रोटी का टुकड़ा..।
एक सवाल मेरा भी सुन लो मैं धरती की पुकार हूँ मैं जन्मी एक नन्ही सी जान इंसानियत पर। एक सवाल मेरा भी सुन लो मैं धरती की पुकार हूँ मैं जन्मी एक नन्ही सी जान ...
जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर। जब जाती हूं थक... तो निकल जाती हूं घर से बाहर।
नादां नारी.. वो तुम्हें बड़े प्यार से छलेगा और तुम उसके छल को प्यार समझोगी.. नादां नारी.. वो तुम्हें बड़े प्यार से छलेगा और तुम उसके छल को प्यार समझोगी....
आप तो सोते में भी अयोध्या धाम टहल रहे हो और मेरी हालत समझने से पल्ला झाड़ने का जुगत आप तो सोते में भी अयोध्या धाम टहल रहे हो और मेरी हालत समझने से पल्ला झाड़न...
द्रास चोटी पर विजय पर एक युद्धदृश्या - एक सजीव चित्रण द्रास चोटी पर विजय पर एक युद्धदृश्या - एक सजीव चित्रण
दूसरी कमला देवी "बेलदारी" करती है उसका पति भी वहीं "चिनाई" करता है। दूसरी कमला देवी "बेलदारी" करती है उसका पति भी वहीं "चिनाई" करता है।
बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे। बस एक अजीब सी ख़ामोशी है यहाँ, एक ठहरा हुआ समय हो जैसे।