STORYMIRROR

Akash Yadav

Others

2  

Akash Yadav

Others

ज़माना और इश्क़

ज़माना और इश्क़

1 min
189

दिल में कुछ आस लिए निकला था

सिखाने मैं इश्क़ ज़माने को

नज़ारा कुछ ऐसा देखा है

तरस गया हूँ मुस्कुराने को।


इंसां इंसां से जलता है यहाँ

खुशियाँ हज़म होती नहीं क्यों

अरे अब तो बरसों लग जाते हैं यहाँ

महज़ अपनों को समझ पाने को।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन