STORYMIRROR

Akash Yadav

Abstract

3  

Akash Yadav

Abstract

शरबत इश्क़ वाला

शरबत इश्क़ वाला

1 min
399

मुझको तू ऐसा पुष्प बना दे 

तुझे देखकर खिल जाऊँ मैं


कुछ राज़ थोड़े बतला दे 

खुद से तो मिल जाऊँ मैं


करता रहे समाज़ ये मनमानी

इसे सुनकर क्यों मुरझाऊँ मैं


पी कर शरबत थोड़ा इश्क़ वाला 

बस तुझमें ही घुल जाऊँ मैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract