STORYMIRROR

Akash Yadav

Tragedy

3  

Akash Yadav

Tragedy

गुलाब इश्क़ का

गुलाब इश्क़ का

1 min
417

खिलाना चाहा, जब भी गुलाब इश्क़ का

ज़माना इस कदर उभरकर आता है,

फूल ले जाता है, अनजान कोई

महज़ कांटा ही हिस्से आता है।


रूबरू हुआ अब, तो पता चला

बदल गया, कमबख्त ये ज़माना

हमने तो सुना था, फ़ूल बोओ तो

यकीनन, फूल ही उगकर आता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy