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संजय असवाल "नूतन"

Tragedy

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संजय असवाल "नूतन"

Tragedy

जिंदगी छोटी जरूर है मगर।

जिंदगी छोटी जरूर है मगर।

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आज सुबह 

एक पुरानी तस्वीर देखी,

जिसमे वो 

खुशियों से उछल रहा था,

बात बात पे अपनी हंसी से 

गाल फुला रहा था,

उसे किसी बात का गम नहीं था

ना उसे आने वाले दिन का इल्म था,

वो जी रहा था 

अपनी एक अलग ही दुनियां में,

उसके चेहरे के भाव 

खुद में मग्न थे,

और वो 

इस दुनियां के जश्न में,

उसे नहीं मालूम था कि

वो कुछ दिनों का मेहमान है,

और वो क्यों पड़े 

इस खेल में,

ये जानने की चाहत में

कि कल क्या होगा,

यहां सभी तो 

कुछ दिनों के मेहमान है,

कुछ आधी उम्र जी जाएंगे 

कुछ पूरी उम्र निभा कर रुखसत पाएंगे,

कुछ यादों में याद रखे जाएंगे

कुछ नफरत के अंगारों में 

दिल में सिए जाएंगे,

वो तो बस खुश है,

कि जो जिंदगी उसने जी है

वो छोटी जरूर है मगर, 

जिन्हे याद रखेगा दिल में 

उनकी यादों के लिए काफी है।



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